देहरादून के चौराहों पर नहीं दिखती जेब्रा क्रासिंग, रेड लाइट होने पर बीच में वाहन खड़ा कर देते हैं लोग

 

देहरादून। 12 नवंबर 2024 को ओएनजीसी चौक पर हुए सड़क हादसे में छह युवक-युवतियों की जान जाने के बाद जिला व पुलिस प्रशासन ने शहर के सभी चौराहे व तिराहों पर सुरक्षा के लिहाज से जेब्रा क्रासिंग व स्टाप लाइन बनाने के आदेश जारी किए।

कुछ चौराहों व तिराहों पर स्पीड ब्रेकर, जेब्रा क्रासिंग बनाने का काम शुरू किया, लेकिन इसके बाद काम ठप हो गया। मौजूदा समय में कई चौराहे व तिराहें ऐसे हैं जहां पर लाइनें मिट चुकी हैं। इस कारण रेड लाइट होने के दौरान चालक चौराहे व तिराहे के बीच में वाहन खड़ा कर देते हैं। जिससे जाम की स्थिति बन जाती है।

शहर की सड़कों पर हर रोज हजारों वाहन दौड़ते हैं। लोग आफिस जाते हैं, बच्चे स्कूल और आपातकालीन सेवाएं भी इन्हीं सड़कों पर होकर गुजरती हैं। लेकिन इन सड़कों पर सबसे जरूरी ट्रैफिक संकेत ही गायब हों तो यातायात व्यवस्था का संतुलन बिगड़ना तय है।

इन दिनों शहर के कई प्रमुख चौराहों, स्कूलों के बाहर और व्यस्त बाजार क्षेत्रों में यातायात संकेतों की कमी दिख रही है। सड़कों पर न तो जेब्रा क्रासिंग दिखती है ना ही गति सीमा के बोर्ड और ना ही दिशा सूचक चिह्न। इससे पैदल यात्रियों व वाहन चालकों दोनों के लिए स्थिति जोखिम भरी बन जाती है।

विभागों के बीच सामंजस्य की कमी

राष्ट्रीय राजमार्ग पर तो यातायात के संकेत दिख भी जाते हैं, लेकिन शहर की अंदरूनी सड़कों पर संकेत गायब हैं। यातायात, नगर निगम व सड़क सुरक्षा से संबंधित अन्य विभागों के बीच सामंजस्य की कमी के चलते खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है। शहर के अंदर ट्रैफिक लाइटें स्मार्ट सिटी ने लगाई है तो इनके संचालन की जिम्मेदारी यातायात पुलिस की है। विभागों के बीच विकास कार्य केवल पत्राचार में ही हो पाता है।

तेजी से कट रहे हैं चालान, सुधार की तरफ नहीं ध्यान

यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के आनलाइन व ड्रोन के माध्यम से तेजी से चालान हो रहे हैं, लेकिन संकेतकों के सुधार की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। शहर के अधिकतर तिराहों व चौराहों पर स्पीड वायलेशन डिटेक्शन सिस्टम (एसवीडीएस) व रेड लाइट वाइलेशन डिटेक्शन (आरएलवीडी) लगाए गए हैं।

वहीं ड्रोन के माध्यम से भी लगातार चालान किए जा रहे हैं। इनसे ओवरस्पीड, रेड लाइट जंप व जेब्रा क्रासिंग व स्टाप लाइन का उल्लंधन करने वालों का चालान किया जा रहा है। वाहन चालकों की थोड़ी सी चूक होने पर पुलिस चालान कर देती है, जबकि सुधार के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।

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