देहरादून। नकरौंदा फाटक पर मंगलवार सुबह हुई घटना ने साबित कर दिया कि भीड़ की जल्दबाजी किस तरह सैकड़ों लोगों की जान पर भारी पड़ सकती थी। मसूरी एक्सप्रेस लच्छीवाला के जंगल में चेन पुलिंग के कारण करीब 10 मिनट तक रुकी रही और इसी देरी ने फाटक के दोनों ओर वाहनों का जमावड़ा बढ़ा दिया। लेकिन स्थिति बिगड़ी उस समय, जब भीड़ ने धैर्य खोते हुए गेटमैन पर चिल्लाकर, दबाव बनाकर व धमकाकर फाटक जबरदस्ती खुलवा दिया, जबकि उसी समय देहरादून की ओर आ रही ट्रेन को पहले ही ग्रीन सिग्नल भेजा जा चुका था।
फाटक खुलते ही लोग बिना सोचे-समझे अपनी-अपनी गाड़ियां निकालने लगे। स्कूली बच्चे, महिलाएं और पैदल यात्री भी पटरी पार करने दौड़ पड़े। किसी को अंदाजा नहीं था कि सामने से मौत की रफ्तार लिए ट्रेन बस कुछ ही दूरी पर आ चुकी है। कुछ ही क्षणों बाद तेज गति से आती ट्रेन अचानक मोड़ के पास दिखाई दी तो ट्रेन को देखते ही लोगों के चेहरों से रंग उड़ गया। चंद सेकंड में वहां चीख-पुकार और भगदड़ मच गई।
स्कूली बच्चों को खींचकर साइकिलों से उतारा गया, दोपहिया चालक बाइक छोड़कर भागे और कई पैदल यात्री पटरी से कूदकर किनारे झाड़ियों में जा गिरे। लोको पायलट ने आपातकालीन ब्रेक लगाए, लेकिन रफ्तार और दूरी कम होने के कारण ट्रेन पूरा फाटक पार करने के बाद ही रुक पाई। जिस क्षण ट्रेन फाटक से गुजरी, उससे कुछ ही सेकंड पहले तक वहां भीड़ खड़ी थी। स्पष्ट है कि यदि दो-चार सेकंड का भी फर्क होता तो यह जल्दबाजी एक भयावह हादसे में बदल सकती थी।
भीड़ की गलतफहमी बनी जानलेवा
ट्रेन को चेन पुलिंग के कारण जंगल में खड़ा देखना संभव नहीं था, इसलिए लोगों ने मान लिया कि ट्रेन दूर है या रद्द हो गई है। इसी गलतफहमी में भीड़ ने गेटमैन महावीर सिंह पर चिल्लाकर, गालियां देकर व धमकियां देकर फाटक खोलने के लिए मजबूर कर दिया। गेटमैन ने रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ की जिद और उग्रता के आगे वह विवश हो गया। ट्रेन के एप्रोच करते ही जो भगदड़ मची, उसमें कई लोग गिरते-पड़ते बचे। कुछ वाहन गलियों में घुसकर रुके, तो कुछ लोग आखिरी सेकंड में ही पटरी से हट पाए। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मात्र 10-15 सेकंड की देरी होती तो दृश्य खौफनाक हो सकता था।
रेलवे में हड़कंप, गेटमैन निलंबित, जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन में हलचल मच गई। गेटमैन को तत्काल निलंबित कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फाटक जबरन खुलवाने वाले लोग भी दोषी हैं और जांच में उनकी भूमिका भी देखी जाएगी। नकरौंदा फाटक पर जो हुआ, वह सिर्फ नियम तोड़ने की घटना नहीं, बल्कि एक सामूहिक लापरवाही थी जिसने सेकंड भर में कई जिंदगियों को मौत के सामने खड़ा कर दिया।