देहरादून। तमिलनाडु से भ्रमण पर देहरादून आए स्कूली बच्चों की वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बस में शिमला बाईपास स्थित सेंट ज्यूड्स चौक पर गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे उस समय आग लग गई, जब बच्चे यहां वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) देखने जा रहे थे।
चालक की सतर्कता से बस में सवार 40 बच्चों व शिक्षकों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, जिससे पुलिस व प्रशासन ने राहत की सांस ली। हालांकि, बस समेत बच्चों का कुछ सामान जलकर खाक हो गया। धुएं के कारण कुछ बच्चों द्वारा सांस में तकलीफ की शिकायत पर उन्हें प्राथमिक उपचार दिलाया गया।
तमिलनाडु से भ्रमण पर आए बच्चे जयपुर घूमने के बाद हरिद्वार आए थे और वहां से गुरुवार को देहरादून के लिए रवाना हुए। एफआरआई भ्रमण के बाद बच्चों को मनाली हिमाचल प्रदेश जाना था। हरिद्वार बाईपास से आईएसबीटी होते हुए बच्चों को लेकर जा रही इलेक्ट्रिक बस देहरादून शहर में सेंट ज्यूड्स चौक से जीएमएस रोड होकर एफआरआई जा रही थी, लेकिन सेंट ज्यूड्स चौक के पास बस के पिछले हिस्से से धुआं उठने लगा।
बच्चों ने खिड़की से बाहर धुआं निकलता देखा और शोर मचाया। स्थिति को भांपते हुए चालक ने तुरंत बस को सड़क किनारे रोका और आपात स्थिति का आभास देते हुए शिक्षकों को सतर्क किया। शिक्षकों ने आनन-फानन के एक-एक कर बच्चों को नीचे सुरक्षित उतारा।
कुछ ही मिनटों में बस में आग की लपटें उठने लगीं। चूंकि, बस में बड़ी संख्या में बच्चे सवार थे, ऐसे में आग लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया, लेकिन शिक्षकों की तत्परता और बच्चों के अनुशासन के चलते कोई भगदड़ नहीं मची।
सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों को आग पर नियंत्रण पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि आग तेजी से फैल रही थी। आखिरकार आग को पूरी तरह बुझा लिया गया, लेकिन तब तक बस का पिछला हिस्सा पूरी तरह जल चुका था।
घटना के बाद बच्चों को वैकल्पिक बस से सुरक्षित स्थान रवाना किया गया। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए मौके पर ही आवश्यक व्यवस्थाएं कीं और संबंधित एजेंसी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
सुरक्षित निकाले गए बच्च खोजते रहे अपना सामान
बस में सवार एक छात्र ने बताया कि जैसे ही धुआं दिखा, हम सब डर गए थे, लेकिन टीचर्स ने हमें शांत रखा और जल्दी बस से उतरने को कहा, तभी हम सुरक्षित बच पाए। एक छात्रा ने कहा कि बस से उतरते समय दिल बहुत तेज धड़क रहा था, लेकिन सभी टीचर हमारे साथ थे, इसलिए हिम्मत बनी रही।
एक अन्य बच्चे ने बताया कि ड्राइवर अंकल ने बहुत जल्दी बस रोक दी, नहीं तो कुछ भी हो सकता था। इस दौरान जलती हुई बस से जो सामान बच्चों का बाहर सड़क पर निकाला गया था, उसमें बच्चे अपना सामान खोजते रहे। अधिकांश बच्चों के बैग, जिनमें कपड़े आदि रखे हुए थे, जल गए।