RBI MPC Meet Update: ज्यादा ब्याज वसूलने वाले बैंकों पर शिकंजा, एक्शन मोड़ में RBI

 

नई दिल्ली :

RBI MPC Meet: वर्तमान में छोटे लोन देने वाले बैंक व एनबीएफसी कंपनियों की भरमार है. सोशल मीडिया पर एक क्लिक पर ही लोन मिल जाता है. लेकिन ये छोटे बैंक व फाइनेंस कंपनियां ग्राहकों से 20 से 25 प्रतिशत तक ब्याज वसूल रही हैं. जिससे ग्राहक कर्ज के चक्रजाल में फंसता चला जा रहा है. रिजर्व बैंक ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए. सभी छोटे बैंक व एनबीएफसी कंपनियों को फटकार लगई है. साथ ही कहा है कि “यह देखा गया है कि कुछ एमएफआई और एनबीएफसी में छोटी रकम के लोन पर ब्याज दरें अधिक हैं और सूदखोरी लगती है.”

सूदखोरी के जाल में फंस रहे ग्राहक

आपको बता दें कि शुक्रवार को यानि आज वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी MPC Meet थी. जिसमें रेपो रेट को तो यथावत रखा ही गया है. साथ ही अधिक ब्याज वसूलने वाले बैंक और एनबीएफसी कंपनीज को भी फटकार लगाई गई है. आपको बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 7 जून को एमपीसी बैठक में एक बात पर कड़ी चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि “कुछ माइक्रोफाइनेंस संस्थान और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFC) छोटी रकम वाले लोन पर उच्च दरों से ब्याज ले रहे हैं,,

यथावत रहेगी रेपो रेट

गवर्नर ने चालू वित्त वर्ष के लिए दूसरी द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक के बाद कहा कि रेपो रेट में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. इसके बाद होम लोन की ईएमआई घटने की उम्मीद और एफडी पर ज्यादा ब्याज की आशा, दोनों खत्म हो गई.गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, “वैश्विक संकट जारी है, लेकिन भारत में सकारात्मक वृद्धि देखी जा रही है, फिर भी हमें नई चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है.”

हर दो महीने में होती है MPC मीटिंग

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग हर दो महीने में होती है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास आज हो रही रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक में रेपो रेट को पुराने लेवल पर बरकरार रख सकते हैं. यह इस वित्त वर्ष की दूसरी मॉनेटरी पॉलिसी है.

 

 

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