देहरादून में गरजे जूनियर हाईस्कूल शिक्षक, सरकार को दिखाई ताकत

देहरादून। लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन चला रहे प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक सोमवार को राजधानी की सड़कों पर उतर आए

आंदोलन के पांचवें चरण में प्रदेश के 13 जनपदों और 95 विकासखंडों से पहुंचे सैकड़ों शिक्षकों ने प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा के नेतृत्व में विशाल गर्जना रैली निकालकर सचिवालय कूच किया।

इस दौरान शहर में कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित रही और पुलिस को ट्रैफिक नियंत्रण के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

परेड ग्राउंड से शुरू हुई गर्जना रैली बुद्धा चौक, घंटाघर, राजपुर रोड और सेंट जोजेफ्स स्कूल चौराहे से होते हुए सचिवालय की ओर बढ़ी। आयकर भवन तिराहे पर भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर शिक्षकों को रोक दिया।

इस दौरान शिक्षकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश कर रहे शिक्षकों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद शिक्षक सड़क किनारे धरने पर बैठ गए।

काफी देर तक चले गतिरोध और प्रदर्शन के बाद सचिवालय स्तर पर वार्ता के लिए शिक्षक प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया।

वार्ता के बाद सचिव स्तर से संगठन को लिखित आश्वासन दिया गया कि जल्द ही शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के सचिवों और संगठन पदाधिकारियों की बैठक कराई जाएगी, जिसमें शिक्षकों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

इस आश्वासन के बाद शिक्षकों ने धरना समाप्त किया, हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि मांगों के समाधान में देरी होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

रैली का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा के साथ प्रदेश महामंत्री जगवीर खरोला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उमेश चौहान, कोषाध्यक्ष मनोज शाह, वरिष्ठ संयुक्त मंत्री सुरेश भट्ट, मीडिया प्रभारी विपिन मेहता सहित सभी 13 जनपदों के अध्यक्षों और पदाधिकारियों ने किया

आंदोलन को अखिल भारतीय शिक्षक संघ, पर्वतीय कर्मचारी संघ, मिनिस्ट्रियल कर्मचारी फेडरेशन, अधिकारी-कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति, लोक निर्माण विभाग संगठन तथा उत्तराखंड एससी-एसटी शिक्षक संगठन सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों का समर्थन भी मिला।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

टीईटी की अनिवार्यता से जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों को मुक्त किया जाए।

त्रिस्तरीय कैडर व्यवस्था लागू कर जूनियर हाईस्कूल का पृथक संचालन किया जाए।

17,140 वेतनमान की वसूली पर रोक लगाई जाए।

प्रारंभिक शिक्षकों की तीन पदोन्नतियां सुनिश्चित की जाएं।

अंतरजनपदीय स्थानांतरण व्यवस्था लागू की जाए।

समग्र शिक्षा का डीडीओ उप शिक्षा अधिकारियों को बनाया जाए।

प्रत्येक जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक और अंग्रेजी विषय के पद सृजित कर कुल पांच पद निर्धारित किए जाएं।

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