देहरादून: कुत्ते के हमले से मासूम का चेहरा बुरी तरह जख्मी, दून अस्पताल में इलाज जारी

देहरादून। टिहरी जिले के थत्यूड़ की ढाई वर्षीय मासूम नायरा पर कुत्ते के हमले ने परिवार को झकझोर कर रख दिया।

बच्ची के चेहरे पर हुए गहरे जख्म इतने गंभीर थे कि राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल के डाक्टर भी एक पल के लिए हैरान रह गए। चेहरे के गाल का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद डाक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया।

स्वजन के अनुसार, नायरा घर के बाहर खेल रही थी, तभी एक कुत्ते ने उस पर अचानक हमला कर दिया। कुत्ते ने पहले बच्ची के कंधे पर दांत गड़ाए और फिर चेहरे पर हमला कर गाल को बुरी तरह नोच डाला

बच्ची की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह उसे कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया। हमले के बाद बच्ची कुछ समय के लिए बेसुध भी हो गई।

स्वजन उसे लेकर दून अस्पताल पहुंचे, जहां एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाने के बाद उसे सर्जरी विभाग में भेजा गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद चेहरे के घावों का विशेष उपचार शुरू किया।

पोती को देख छलक पड़ीं दादा की आंखें

नायरा के दादा बलवंत दास इन दिनों दून अस्पताल के आर्थोपेडिक वार्ड में भर्ती हैं। उनके पैर का आपरेशन हुआ है। इसी दौरान गांव से पोती के घायल होने की सूचना मिली।

उन्होंने पोती की हालत देखी तो उनकी आंखें भर आईं। दर्द से कराहती मासूम को देखकर वह बार-बार डाक्टरों से बेहतर उपचार की गुहार लगाते रहे।

दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस बिष्ट ने बताया कि बच्ची का उपचार प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन व आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है।

बढ़ रहे डाग बाइट के मामले

राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डा. एनएस बिष्ट के अनुसार प्रदेश में डाग बाइट के सर्वाधिक मामले देहरादून और हरिद्वार से सामने आते हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में सितंबर तक 24,605 डाग बाइट के मामले दर्ज किए गए थे। अगस्त 2025 तक ही यह संख्या करीब 18 हजार पहुंच चुकी थी।

उन्होंने कहा कि कुत्ते के काटने के बाद समय पर उपचार न मिलने पर रेबीज जानलेवा साबित हो सकता है, जबकि सही समय पर इलाज और टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।

यदि कुत्ता काट ले तो यह करें

घाव को तुरंत कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं।

एंटीसेप्टिक का प्रयोग करें। घाव पर हल्दी, तेल, मिट्टी या अन्य घरेलू नुस्खे न लगाएं।

तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाएं।

गंभीर घाव होने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की आवश्यकता पड़ सकती है।

चिकित्सक द्वारा बताए गए पूरे टीकाकरण कोर्स को अवश्य पूरा करें।

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