देहरादून में साल के 26 हजार पेड़ों की ‘मौत’ का फरमान, बीमारी से बने जिंदा लाश

देहरादून। कालसी और देहरादून वन प्रभाग के साल के जंगलों से ऐसी खौफनाक खबर आई है, जिसने वन विभाग की नींद उड़ा दी है। दून के फेफड़े कहे जाने वाले इन जंगलों में अदृश्य साइलेंट किलर गहरे तक जड़ें जमा चुका है। नाम है होप्लो कीट।

यह कोई आम कीड़ा नहीं, बल्कि वो जल्लाद है, जो साल के पेड़ों को जिंदा लाश में तब्दील करने में लगा है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि अब दोनों प्रभागों के जंगलों में 26,439 पेड़ों को मौत की नींद सुलाने की मुकम्मल तैयारी कर ली गई है। इस क्रम में 22,170 पेड़ों को काटने की हरी झंडी पहले ही मिल चुकी थी और अब अन्य 4269 पेड़ों के कटान की भी अनुमति मांगी गई है

होप्लो (साल बोरर) का प्रकोप

दोनों प्रभागों के साल के जंगलों में पिछले साल से होप्लो (साल बोरर) के प्रकोप को लेकर स्थिति ज्यादा नाजुक हुई है। यह कीट बड़े पैमाने पर साल के पेड़ों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। वन विभाग ने पड़ताल कराई तो पता चला कि देहरादून की झाझरा, मल्हान, आशारोड़ी, लच्छीवाला व कालसी की तिमली रेंज में खतरनाक स्थिति है

ये बात भी आई कि पिछले साल लंबे समय तक खिंचे मानसून और नमी ने होप्लो को तेजी से पनपाने में कसर नहीं छोड़ी। हाल में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की क्षेत्रीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने भी इन प्रभागों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद देहरादून प्रभाग में साल के 19170 और कालसी में 3000 पेड़ों को काटने की हरी झंडी दी गई।

ये पेड़ होप्लो संक्रमण की दृष्टि से श्रेणी-एक (पूरा पेड़ सूखना) व श्रेणी-दो (खोखले पेड़ों के पत्ते गिरना) में हैं। समिति ने श्रेणी-तीन (पेड़ सूख गया, लेकिन कुछ टहनियां हरी हैं) के पेड़ों को काटने के संबंध में प्रस्ताव भेजने को कहा।

उच्चाधिकार प्राप्त समिति को भेजा प्रस्ताव

वन विभाग की स्थायी परामर्शदात्री समिति की शुक्रवार को वन मुख्यालय में विभाग के मुखिया पीसीसीएफ आरके मिश्र की अध्यक्षता में हुर्ई बैठक में श्रेणी तीन के पेड़ों को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया गया।

बैठक में देहरादून की बड़कोट, लच्छीवाला, थानो, झाझरा, मल्हान व मालसी रेंज में खड़े ऐसे 4269 पेड़ों के संबंध में क्षेत्रीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया। पीसीसीएफ मिश्र के अनुसार यह प्रस्ताव भेज दिया गया है। अब जल्द ही दोनों प्रभागों में होप्लो प्रभावित पेड़ों के कटान को वन विकास निगम को लाट आवंटित की जाएंगी।

इसलिए काटना है विकल्प

होप्लो प्रभावित पेड़ के तने में इस कीट का लार्वा होता है। मानसून की पहली फुहार पड़ते ही प्यूपा वयस्क होकर निकलता है और स्वस्थ पेड़ों पर अंडे देता है। यदि होप्लो ग्रसित पेड़ों को हटाया नहीं गया तो उसमें मौजूद लाखों कीड़े अन्य पेड़ों को संक्रमित कर देंगे।

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