देहरादून। उत्तराखंड में डेंगू और मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कभी डेंगू ने विस्फोटक रूप लिया तो कभी मलेरिया के घातक पीएफ (प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम) मामलों ने खतरे की घंटी बजाई।
बदलते मौसम, बढ़ते तापमान के चलते अब मैदान के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी डेंगू-मलेरिया के संक्रमण का दायरा बढ़ गया है। राहत की बात यह है कि लगातार निगरानी, समय पर जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था के कारण राज्य हाल के वर्षों में मौतों पर काफी हद तक नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहा है
2023 में डेंगू ने बढ़ाई सबसे ज्यादा चिंता
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 उत्तराखंड में डेंगू के लिहाज से सबसे गंभीर साबित हुआ। उस साल राज्य में 4320 मामले आए और 17 मौतें दर्ज हुईं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर एंटी-लार्वा अभियान, फागिंग और घर-घर सर्वे शुरू किया, जिसका असर अगले वर्षों में देखने को मिला।
प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया बढ़ा रहा चिंता
वर्ष 2024 में मलेरिया मामलों में अचानक उछाल आया, जबकि 2025 और 2026 में कुल संक्रमित कम होने के बावजूद प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया मामलों का अनुपात तेजी से बढ़ा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व देहरादून मलेरिया के लिहाज से सबसे संवेदनशील हैं। राज्य का लक्ष्य वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन हासिल करना है।
सामान्य मलेरिया की तुलना में खतरनाक
प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से शरीर में पहुंचता है। यह सामान्य मलेरिया की तुलना में तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इसमें तेज बुखार, कमजोरी, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत और कई मामलों में अंग प्रभावित होने का खतरा रहता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।