देहरादून। राजधानी में पालतू खूंखार कुत्तों का खतरा गंभीर होता जा रहा है। नगर निगम की सख्ती केवल हादसों के बाद ही नजर आती है।
वसंत विहार क्षेत्र में जनगणना कार्य के दौरान महिला शिक्षिका आशा भंडारी पर पालतू राटविलर के हमले के बाद नगर निगम ने कुत्ते के मालिक अजय नेगी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि दोबारा ऐसी लापरवाही मिलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
जांच में सामने आया कि कुत्ते का लाइसेंस नवीनीकृत नहीं था और वैक्सीनेशन का रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं मिला। ऐसे में यह मामला सिर्फ एक हमले का नहीं, बल्कि नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था की गंभीर खामी उजागर करता है।
नगर निगम सख्त नियमों और कार्रवाई के दावे जरूर करता है, लेकिन हकीकत यह है कि बिना पंजीकरण, बिना वैक्सीनेशन और नियमों का उल्लंघन कर पाले जा रहे कुत्तों पर स्वतः कार्रवाई शायद ही कभी दिखती है।
अक्सर कार्रवाई तब होती है, जब कोई गंभीर घटना सामने आ जाती है। यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि राजधानी में पिछले कुछ वर्षों में पालतू और आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं।
बढ़ते हमलों और नागरिकों की मांग के बाद नगर निगम ने पालतू/निराश्रित श्वान बायलाज-2025 लागू किया है। वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डा. वरुण अग्रवाल की ओर से जारी आदेश के अनुसार हर पालतू कुत्ते का लाइसेंस अनिवार्य है।
सवाल जुर्माने का नहीं, सुरक्षा का
जनगणना जैसी सरकारी ड्यूटी पर गई शिक्षिका पर हमला इस बात का संकेत है कि खतरा अब सिर्फ आम नागरिकों तक सीमित नहीं है।
सवाल यह है कि जब नियम पहले से लागू हैं, तो बिना लाइसेंस और बिना वैक्सीनेशन वाले खूंखार कुत्ते खुले तौर पर कैसे पाले जा रहे हैं?
नागरिकों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और स्वतः सत्यापन अभियान चलें, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।