साथी की जान बचाई, खुद न लौटे: देहरादून में कैप्टन चौरसिया ने दिखाया साहस, बलिदान की कहानी

देहरादून। भैरव बटालियन की घातक प्लाटून प्रतियोगिता के दौरान गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी कैप्टन प्रशांत चौरसिया ने साथी की जान बचाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह घटना 20 मार्च की बताई जा रही है।

प्रतियोगिता के दौरान कैप्टन चौरसिया अपनी टीम के साथ नदी पार कर रहे थे, तभी एक जवान खतरे में पड़ा। अपने साथी की जान बचाने के लिए उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के नदी में छलांग लगा दी।

पानी के नीचे पत्थर से टकराने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत दून स्थित मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया का सका।

उन्होंने रविवार को अस्पताल में अंतिम सांस ली।कैप्टन चौरसिया ने अपने साथी जवान की जान तो बचा ली, लेकिन खुद अपने प्राणों की आहुति देकर सच्चे सैनिक की भूमिका निभाई।

बटालियन के अधिकारी उन्हें एक साहसी और निडर अधिकारी के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने अपने अंतिम क्षण तक घातक भावना को साकार किया।

कैप्टन प्रशांत चौरसिया अपने माता-पिता के तीन संतानों में मंझले थे। बड़ी बहन सलोनी का विवाह बीते माह हुआ है, जबकि छोटा भाई मयंक चौरसिया घर पर रहकर परिवार की जिम्मेदारियों में सहयोग कर रहा है।

सैन्य सूत्रों का कहना है कि कैप्टन की बहादुरी और निडरता न केवल उनकी टीम के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। उनका यह बलिदान यह संदेश देता है कि देश सेवा के लिए हर क्षण त्याग और साहस की आवश्यकता होती है

कैप्टन प्रशांत चौरसिया की इस वीरता ने यह साबित कर दिया कि असली नायक वही हैं, जो अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की रक्षा के लिए आगे आते हैं। उनकी स्मृति हमेशा भारतीय सेना और देशवासियों के दिलों में अमर रहेगी।

 

 

 

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