देहरादून। सुबह ठिठुरन, दोपहर में तेज धूप की तपिश और शाम होते-होते सर्द हवाओं का प्रकोप लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जनवरी अपने अंतिम पड़ाव पर है और फरवरी की दस्तक से पहले मौसम का यह उतार-चढ़ाव आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
बीते दिनों पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी का असर निचले क्षेत्रों तक साफ दिखाई दे रहा है। सुबह और शाम बर्फीली हवाएं कंपकंपी बढ़ा रही हैं, जबकि दिन में खिली तेज धूप से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार मौसम के इस दोहरे मिजाज का सीधा असर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ रहा है। सुबह-शाम की ठंड और दिन की गर्मी के बीच तालमेल न बैठ पाने से सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार, गले में खराश और वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।
बुजुर्गों, बच्चों और पहले से सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम विशेष रूप से जोखिम भरा माना जा रहा है। दून के वरिष्ठ डाक्टरों का कहना है कि तापमान में अचानक बदलाव से शरीर को खुद को ढालने में कठिनाई होती है।
इससे एलर्जी, अस्थमा के दौरे, सिरदर्द और थकान की शिकायतें बढ़ सकती हैं। तेज धूप के कारण दोपहर में डिहाइड्रेशन और आंखों में जलन जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
वहीं, शाम की ठंडी हवाएं दोबारा शरीर को ठंड के संपर्क में ला देती हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। देहरादून में मौसम का यह बदलता मिजाज आने वाले दिनों में भी बना रह सकता है। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सेहत को सुरक्षित रखने का सबसे बेहतर तरीका है।
बचाव के उपाय जरूरी, रखें विशेष ध्यान
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डा. प्रवीण पंवार सलाह देते हैं कि इस मौसम में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। सुबह और शाम हल्के गर्म कपड़े पहनें, जबकि दिन में जरूरत के अनुसार परतें कम की जा सकती हैं।
पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीना, पौष्टिक आहार लेना और ताजे फल-सब्जियों को भोजन में शामिल करना लाभकारी रहेगा। धूप में निकलते समय आंखों की सुरक्षा करें और अत्यधिक ठंड या गर्मी से सीधे संपर्क से बचें।
इसके अलावा नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और हाथों की साफ-सफाई पर ध्यान देना भी संक्रमण से बचाव में सहायक है। किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न करें और चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।