देहरादून। नगर निगम में 56 आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाने के निर्णय ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर कर्मचारी संगठनों तक जबर्दस्त हंगामा खड़ा कर दिया है।
कर्मचारी नेताओं ने नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मेहनत से काम करने वालों को बाहर किया जा रहा है, जबकि विधायक-अधिकारियों की सिफारिश पर लगे ‘अज्ञात’ कर्मचारी आज भी सुरक्षित हैं। उन्होंने नगर आयुक्त से छंटनी के लिए कर्मचारियों की सूची जांच के बाद दोबारा तय करने की मांग की है।
बुधवार को नगर निगम विकास कर्मचारी संघ, स्वच्छकार संघ समेत तमाम कर्मचारी संगठनों ने नगर आयुक्त नमामी बंसल से भेंट कर 56 कर्मचारियों को निकाले जाने की सूची पर कड़ा ऐतराज जताया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जिन कर्मियों को हटाने का निर्णय लिया गया है, वे वर्षों से निगम में नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं, जबकि कई ऐसे कर्मचारी हैं, जो कभी कार्यालय में दिखाई ही नहीं देते।
नगर निगम विकास कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार और सचिव योगेश आनंद ने आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के माध्यम से नियुक्त कई आउटसोर्स कर्मी नेताओं, मंत्रियों-विधायकों के घरों और कार्यालयों में तैनात हैं। निगम हर माह लाखों रुपये वेतन दे रहा है, लेकिन उसे खुद नहीं पता कि कर्मचारी कहां सेवा दे रहा है।
उन्होंने 56 कर्मचारियों की सूची को रद कर दोबारा तैयार करने की मांग की और कहा कि यदि छंटनी करनी ही है तो उन कर्मचारियों की हो, जो सिफारिश पर लगे हैं और कभी निगम कार्यालय में नजर तक नहीं आते। नगर आयुक्त नमामी बंसल ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की दोबारा सूची तैयार कराई जाएगी। जो कर्मचारी अनावश्यक पाए जाएंगे या निगम के लिए उपयोगी नहीं होंगे, उन्हें हटाया जाएगा।
उनका कहना है कि हालिया समीक्षा में यह सामने आया कि कई कर्मचारी निगम के कार्य में योगदान नहीं दे रहे, जिससे निगम पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी कारण कर्मचारियों की संख्या कम करने पर विचार किया जा रहा है। इस दौरान कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नाम बहादुर, स्वच्छकार संघ के अध्यक्ष सोनू खैरवाल और सचिव धीरज भारती भी मौजूद रहे।
अनुमति 100 की, तैनाती 363 की!
कर्मचारी नेताओं ने एक और गंभीर खुलासा करते हुए बताया कि शासन की ओर से नगर निगम को महज 100 आउटसोर्स कर्मचारियों की अनुमति है, लेकिन वर्तमान में निगम में 363 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से 140 सफाई कर्मचारी हैं, जबकि शेष डाटा एंट्री आपरेटर और चतुर्थ श्रेणी कर्मी हैं। हैरानी की बात यह है कि निगम में रोजाना काम करते हुए केवल 60-70 कर्मचारी ही दिखाई देते हैं।