क्यों कुछ लोग बिना रिस्क फैक्टर्स के भी हो जाते हैं Cancer के शिकार? डॉक्टर ने दिया जवाब

नई दिल्ली। हममें से ज्यादातर लोग कैंसर को धूम्रपान, शराब, प्रदूषण या फैमिली हिस्ट्री से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग जिन्हें न तो ये बुरी आदतें होती हैं, न कोई फैमिली हिस्ट्री, फिर भी वे इस खतरनाक बीमारी की चपेट में कैसे आ जाते हैं

डॉक्टर तरंग कृष्णा की मानें तो इस सवाल का जवाब सिर्फ शारीरिक कारणों में नहीं, बल्कि हमारे अंदर छिपे कुछ साइलेंट स्ट्रेस में भी हो सकता है। इसे 4 शब्दों में आसानी से समझा जा सकता है- “Constant Irritation Causes Cancer”, यानी लगातार मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक परेशानियां भी शरीर में गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकती हैं।

स्ट्रेस सिर्फ दिमाग का नहीं, शरीर का भी दुश्मन

हर दिन की भागदौड़, अधूरी नींद, रिश्तों की खींचतान और अनकहा दर्द- ये सब मिलकर हमारे शरीर के अंदर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो बीमारी को न्योता देता है। जब ये तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शरीर की हीलिंग पावर यानी खुद को ठीक करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।

 

हम कई बार अपने इमोशन्स को दबा लेते हैं- न बोलते हैं, न जताते हैं! लेकिन ये दबी हुई भावनाएं शरीर में एक किस्म की ‘इनफ्लेमेशन’ यानी सूजन पैदा करती हैं। विज्ञान भी मानता है कि जब शरीर में बार-बार सूजन होती है, तो वह कैंसर जैसे रोगों की जमीन तैयार करती है।

 

कभी लगातार थकान, कभी बार-बार सिरदर्द या पाचन में गड़बड़ी- ये सब संकेत हो सकते हैं कि शरीर किसी अंदरूनी तनाव से जूझ रहा है। लेकिन जब हम इन संकेतों को मामूली समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, तो वही छोटी समस्या बाद में गंभीर रूप ले सकती है।

मानसिक शांति बनेगी बचाव का रास्ता

कई डॉक्टर अब यह मानने लगे हैं कि योग, ध्यान, गहरी सांस लेने की क्रियाएं और मन की शांति बनाए रखना न सिर्फ मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी हैं, बल्कि ये शरीर को कैंसर जैसी बीमारियों से भी बचा सकते हैं। जब हम स्ट्रेस से बाहर निकलते हैं, तो हमारी इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर खुद को बेहतर तरीके से रिपेयर कर पाता है।

स्ट्रेस सिर्फ दिमाग का नहीं, शरीर का भी दुश्मन

हर दिन की भागदौड़, अधूरी नींद, रिश्तों की खींचतान और अनकहा दर्द- ये सब मिलकर हमारे शरीर के अंदर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो बीमारी को न्योता देता है। जब ये तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो शरीर की हीलिंग पावर यानी खुद को ठीक करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।

जब फीलिंग्स बन जाएं बीमारी की वजह

हम कई बार अपने इमोशन्स को दबा लेते हैं- न बोलते हैं, न जताते हैं! लेकिन ये दबी हुई भावनाएं शरीर में एक किस्म की ‘इनफ्लेमेशन’ यानी सूजन पैदा करती हैं। विज्ञान भी मानता है कि जब शरीर में बार-बार सूजन होती है, तो वह कैंसर जैसे रोगों की जमीन तैयार करती है।

कभी लगातार थकान, कभी बार-बार सिरदर्द या पाचन में गड़बड़ी- ये सब संकेत हो सकते हैं कि शरीर किसी अंदरूनी तनाव से जूझ रहा है। लेकिन जब हम इन संकेतों को मामूली समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, तो वही छोटी समस्या बाद में गंभीर रूप ले सकती है।

मानसिक शांति बनेगी बचाव का रास्ता

कई डॉक्टर अब यह मानने लगे हैं कि योग, ध्यान, गहरी सांस लेने की क्रियाएं और मन की शांति बनाए रखना न सिर्फ मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी हैं, बल्कि ये शरीर को कैंसर जैसी बीमारियों से भी बचा सकते हैं। जब हम स्ट्रेस से बाहर निकलते हैं, तो हमारी इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर खुद को बेहतर तरीके से रिपेयर कर पाता है ।

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