देहरादून। Golden Card Cashless Treatment: राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए शुरू की गई राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) की ””सेहत”” नासाज है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण पर अस्पतालों की देनदारी लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान समय में अस्पतालों का करीब 100 करोड़ का बकाया है। बकाया भुगतान न होने पर कई अस्पताल गोल्डन कार्डधारकों के इलाज से कन्नी काटने लगे हैं।
राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में कर्मचारियों व पेंशनर के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) की शुरुआत की थी। योजना में कर्मचारियों व पेंशनरों के लिए असीमित व्यय पर कैशलेस उपचार की सुविधा है। जिसके लिए लाभार्थी के वेतन व पेंशन से अंशदान की कटौती होती है। इस योजना के तहत अब तक चार लाख 80 हजार गोल्डन कार्ड बन चुके हैं
गोल्डन कार्डधारक को श्रेणी के आधार पर उन्हें अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। पे-बैंड के अनुसार सामान्य, सेमी प्राइवेट, प्राइवेट व डीलक्स रूम आवंटित होते हैं। सरकारी अस्पतालों में अभी भी सुविधाएं उस अनुरूप नहीं हैं, ऐसे में अभी तक योजना के तहत 70 प्रतिशत लोगों का उपचार निजी अस्पतालों में हुआ है। जिसका केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की दरों पर भुगतान किया जाता है।
खास बात यह कि लाभार्थियों को राज्य से बाहर भी इलाज की सुविधा मिलती है। पर बढ़ते खर्च के कारण स्थिति खराब होने लगी है। प्रदेश व प्रदेश के बाहर के कई निजी अस्पतालों की देनदारी करोड़ों में पहुंच गई है। जिस पर अस्पतालों ने प्राधिकरण को पत्र भेज जल्द बकाया भुगतान का अनुरोध किया है। भुगतान न होने पर इलाज बंद करने की चेतावनी दी है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक डा वीएस टोलिया का कहना है कि भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें कुछ तकनीकी दिक्कत आ रही थी। जल्द भुगतान कर दिया जाएगा।
गोल्डन कार्डधारक को श्रेणी के आधार पर उन्हें अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। पे-बैंड के अनुसार सामान्य, सेमी प्राइवेट, प्राइवेट व डीलक्स रूम आवंटित होते हैं। सरकारी अस्पतालों में अभी भी सुविधाएं उस अनुरूप नहीं हैं, ऐसे में अभी तक योजना के तहत 70 प्रतिशत लोगों का उपचार निजी अस्पतालों में हुआ है। जिसका केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की दरों पर भुगतान किया जाता है।
खास बात यह कि लाभार्थियों को राज्य से बाहर भी इलाज की सुविधा मिलती है। पर बढ़ते खर्च के कारण स्थिति खराब होने लगी है। प्रदेश व प्रदेश के बाहर के कई निजी अस्पतालों की देनदारी करोड़ों में पहुंच गई है। जिस पर अस्पतालों ने प्राधिकरण को पत्र भेज जल्द बकाया भुगतान का अनुरोध किया है। भुगतान न होने पर इलाज बंद करने की चेतावनी दी है
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक डा वीएस टोलिया का कहना है कि भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें कुछ तकनीकी दिक्कत आ रही थी। जल्द भुगतान कर दिया जाएगा।
राज्य कर्मचारी व पेंशनर लंबे वक्त से गोल्डन कार्डधारक को ओपीडी में निश्शुल्क दवा व जांच की सुविदा देने की मांग की जा रही है। वहीं, योजना से बाहर करीब 35 हजार पेंशनर को योजना से जोड़ने को एक अवसर देने की मांग भी की जा रही है। पर इस पर भी अभी तक निर्णय नहीं हो सका है।