देहरादून। हृदय यानी दिल शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन वर्तमान जीवनशैली एवं रहन-सहन में आया बदलाव हमारे हृदय के लिए खतरनाक होता जा रहा है। बचाव के लिए हृदय का ध्यान व उसे निरोग रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही जीवनशैली में बदलाव लाने की भी जरूरत है। कई बार लोग छाती में दर्द को हल्के में ले लेते हैं। अकसर इसे पेट में गैस होने से जुड़ा दर्द मान लिया जाता है लेकिन कई बार छाती का यह दर्द गैस आदि के कारण नहीं बल्कि हृदय से संबंधित बीमारी हो सकती है।
हृदय रोग के प्रारंभिक लक्षणों को पहचानना जरूरी है। शुरुआती लक्षण जान लेने से हृदय की गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। त्हदय रोगों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, एंजाइना व हृदयाघात प्रमुख हैं। इन बीमारियों या परेशानियों का हृदय पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जब हृदय के किसी भाग में धमनियों और नसों के जरिये फ्लो होने वाले रक्त में परेशानी पेश आए तो वह आर्टरी डिजीज बन जाता है। इसके अलावा एंजाइना को लोग कई बार छाती दर्द मान लेते हैं। यह रोग खून के थक्के जम जाने से होता है। इसमें धमनियां रक्त के थक्के जम जाने के कारण संकीर्ण हो जाती हैं। इसके अलावा अत्यधिक बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल से हृदय की नसों में खून का फ्लो रुक जाना हृदयघात को अंजाम देता है।
बिगड़े खानपान से ब्लड प्रैशर, शुगर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां आम हो रही हैं। लंबे समय तक चलते हुए ये बीमारियां हृदय रोगों को बुलावा देती हैं। इसके अलावा शरीर का मोटापा भी हृदय रोगों का कारण बनता है। कई बार लोगों को अचानक छाती में दर्द होने लगता है और लोग इसे गैस्ट्रिक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में समस्या अधिक बढ़ जाने का खतरा रहता है।
कच्ची सब्जियां हृदय रोगों से बचाती हैं। रोजाना गाजर, मूली, शलजम और खीरा भरपूर मात्रा में खाना चाहिए। मौसमी फलों को भोजन में शामिल करें। साथ ही पत्तेदार सब्जियां और अन्य सभी सब्जियों व दालों का सेवन भी जरूरी है। चोकरयुक्त आटा इस्तेमाल कर सकते हैं। दिन में कम से कम एक घंटा सैर व व्यायाम करें।
इन लक्षणों को हल्के में न लें
सीने में तेज दर्द
बिना कारण पसीना आना
बेचैनी अनुभव होना
जबड़े-गर्दन और पीठ में दर्द होना
सांस लेने में कठिनाई होना
सांस छोटी होना
जल्दी-जल्दी सांस लेना व चक्कर आना
पल्स का धीरे-धीरे कम होना