देहरादून। गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त उपचार देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना में दून मेडिकल कालेज अस्पताल में ऐसा खेल पकड़ में आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल में एक व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड पर दूसरे व्यक्ति का इलाज कराया जा रहा था। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को तहरीर दे दी है।
अब जांच का फोकस सिर्फ एक फर्जी भर्ती पर नहीं, बल्कि इस आशंका पर भी है कि कहीं आयुष्मान योजना में सरकारी धन की बंदरबांट के लिए कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि पूरा मामला बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद सामने आया। यानी जिस व्यक्ति के नाम पर आयुष्मान कार्ड था, उसने अस्पताल में आकर अपनी पहचान दर्ज कराई, लेकिन इलाज किसी दूसरे व्यक्ति ने कराया।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि पहचान सत्यापन की बहुस्तरीय व्यवस्था के बावजूद यह खेल आखिर कैसे चल गया।
जानकारी के अनुसार गोविंदगढ़ निवासी मंजीत सिंह ने 26 मई को दून अस्पताल के आयुष्मान मित्र काउंटर पर बायोमेट्रिक फोटो मांगी। फोटो उपलब्ध नहीं कराई गई तो आयुष्मान मित्र स्वयं कार्डियोलाजी वार्ड पहुंच गया
वहां मौजूद नर्सिंग अधिकारी को जब मंजीत सिंह का आधार कार्ड और फोटो दिखाई गई तो उन्होंने साफ कहा कि भर्ती मरीज यह व्यक्ति नहीं है। यहीं से पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हो गईं
सूत्रों के अनुसार पुलिस अब अस्पताल के रिकार्ड, सीसीटीवी फुटेज, आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज बायोमेट्रिक विवरण, भर्ती और डिस्चार्ज दस्तावेजों के साथ संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल रिकार्ड भी खंगालने की तैयारी कर रही है। इस दौरान अस्पताल में कुछ देर हंगामे की स्थिति भी रही।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। 30 मई को हुई जांच में यह स्पष्ट हो गया कि जिस व्यक्ति के नाम पर आयुष्मान कार्ड बना था, इलाज वह नहीं करा रहा था।
अस्पताल में भर्ती मरीज कोई और था। जांच के दौरान ही मंजीत सिंह दोपहर करीब दो बजे अस्पताल पहुंचा और आयुष्मान काउंटर से अपना आधार कार्ड वापस मांगने लगा। अस्पताल कर्मियों को संदेह हुआ तो उसे पूछताछ के लिए रोका गया। बताया जा रहा है कि वह वहां से निकलने का प्रयास भी कर रहा था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोक लिया।
पूछताछ में सामने आया पूरा खेल
अस्पताल प्रशासन के अनुसार पूछताछ में मंजीत सिंह ने स्वीकार किया कि उसके आयुष्मान कार्ड पर मेरठ जिले के मवाना क्षेत्र निवासी विक्की का इलाज कराया जा रहा था। विक्की की उम्र करीब 42 वर्ष बताई गई है।
मामले का पर्दाफाश होने के बाद उप चिकित्सा अधीक्षक ने विक्की को तत्काल सीसीयू भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जांच में कमजोरी की शिकायत मिलने पर उसे पुनः भर्ती कर लिया गया।
एफआइआर की भनक लगी तो बिगड़ी तबीयत
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार जब मंजीत सिंह को यह जानकारी मिली कि मामले में पुलिस कार्रवाई और एफआइआर दर्ज हो सकती है तो उसने सीने में दर्द की शिकायत शुरू कर दी।
वह अस्पताल परिसर में जमीन पर लेट गया। बाद में उसे उपचार के लिए इमरजेंसी भेजा गया। इस दौरान पुलिस कर्मी भी उसके साथ मौजूद रहे।