देहरादून। उम्र के आखिरी पड़ाव में जिस बेटे को बुजुर्ग पिता ने अपना सहारा समझा, वही इलाज के बहाने उन्हें दून मेडिकल कालेज अस्पताल में अकेला छोड़कर चला गया। शुकवार को अस्पताल में संवेदनहीनता की यह तस्वीर हर किसी को झकझोर गई।
गढ़ी कैंट निवासी 70 वर्षीय सुरेश त्यागी करीब तीन घंटे तक हड्डी रोग विभाग के बाहर स्ट्रेचर पर दर्द से कराहते रहे, लेकिन उन्हें लेकर आया बेटा वापस नहीं लौटा। बाद में सुरक्षाकर्मियों की नजर पड़ने पर पूरे मामले का पता चला। बुजुर्ग ने बताया कि लंबे समय से उनके पैर और कमर में दर्द है। शुक्रवार सुबह बेटा आटो से उन्हें दून अस्पताल लेकर आया
पर्चा बनवाने के बाद एक्स-रे कराया गया। करीब 11 बजे रिपोर्ट आने पर हड्डी रोग विभाग के डाक्टरों ने उन्हें भर्ती करने की सलाह दी। आरोप है कि भर्ती की बात सुनते ही बेटा वहां से चला गया। शुरुआत में सुरेश त्यागी को लगा कि वह किसी काम से बाहर गया है व थोड़ी देर में लौट आएगा, लेकिन घंटों बीतने के बाद भी उसका पता नहीं चला
सुरक्षाकर्मियों ने पूछताछ की
दोपहर करीब दो बजे तक जब बुजुर्ग उसी हालत में स्ट्रेचर पर पड़े रहे तो अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने पूछताछ शुरू की। फोन पर संपर्क करने पर पता चला कि बेटा काफी पहले अस्पताल छोड़कर जा चुका है। सुरेश ने बताया कि उनकी पत्नी उर्मिला एक स्कूल में सुरक्षाकर्मी हैं। ड्यूटी खत्म होने के बाद वह अस्पताल पहुंचीं और उनकी देखभाल की।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में मामला चर्चा का विषय बना रहा। मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों के बीच घटना को लेकर दुख और नाराजगी देखने को मिली। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जीवनभर परिवार के लिए संघर्ष करने वाले बुजुर्ग आखिर अपने ही घरों में क्यों असुरक्षित होते जा रहे हैं।
बुजुर्गों के लिए घर ही बन रहा सबसे असुरक्षित ठिकाना
देहरादून में बुजुर्गों के साथ घरेलू उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिला प्रशासन और डीएम कार्यालय तक रोजाना ऐसे मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें बेटे-बहू द्वारा माता-पिता को प्रताड़ित करने, घर से निकालने, इलाज न कराने और संपत्ति के लिए दबाव बनाने की शिकायतें आती हैं।
कई मामलों में बुजुर्गों को भोजन, दवा और देखभाल तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कुछ प्रकरणों में तो संपत्ति अपने नाम कराने के बाद बेटा व बहू बुजुर्गों को अकेला छोड़ दे रहे हैं। बुजुर्ग माता-पिता भरण-पोषण अधिनियम के तहत कई मामलों में कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन सामाजिक संवेदनहीनता लगातार चिंता बढ़ा रही है।