dehradun-city देहरादून नगर निगम: पार्षदों के 25 हजार मासिक मानदेय प्रस्ताव को मिली मंजूरी

देहरादून। नगर निगम देहरादून की बोर्ड बैठक के दूसरे दिन पार्षदों के मानदेय को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग पर मुहर लग गई।

25 हजार रुपये मासिक मानदेय का प्रस्ताव पास कर शासन को भेजा जाएगा, हालांकि अंतिम निर्णय अब सरकार के स्तर पर होना है

इसके अलावा बैठक में संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के विपक्ष की ओर से पास न होने देने पर निंदा प्रस्ताव रखा गया, जो कि कांग्रेस पार्षदों के कड़े विरोध के बावजूद पास किया गया

नगर निगम की बोर्ड बैठक में इस बार कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें पार्षदों के मानदेय को 25 हजार रुपये मासिक तय करने का प्रस्ताव प्रमुख रहा

महापौर सौरभ थपलियाल की अध्यक्षता में यह प्रस्ताव पास किया गया, जिसे अब शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

पार्षद लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग उठा रहे थे। ऐसे में इस प्रस्ताव के पास होने को बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि अंतिम निर्णय शासन और प्रशासन स्तर पर लिया जाएगा।

बैठक में महिला आरक्षण को लेकर भी जोरदार बहस हुई। भाजपा पार्षदों ने नारी शक्ति वंदन एक्ट का मुद्दा उठाते हुए प्रस्ताव पास कराया, जिस पर कांग्रेस पार्षदों ने विरोध जताया।

मेयर सौरभ थपलियाल ने कहा कि इस विषय पर सभी दलों को एकजुट होना चाहिए। वहीं, कांग्रेस पार्षद राबिन त्यागी ने बिल में कमियां बताते हुए आपत्ति जताई। काफी बहस के बाद प्रस्ताव पास कर दिया गया।

निगम की बोर्ड बैठक तीसरे दिन तक खिंची

इतिहास में पहली बार तीन दिन बैठक चलेगी। नगर निगम की बोर्ड बैठक इस बार लंबी खिंचती नजर आ रही है। गुरुवार को दूसरे दिन चली मैराथन बैठक के बाद भी बजट समेत कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी।

ऐसे में अब बैठक को शनिवार तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण सदन की अगली कार्यवाही शनिवार को होगी।

नगर निगम देहरादून के इतिहास में यह पहला मौका है जब बोर्ड बैठक लगातार तीन दिन तक चल रही है। दूसरे दिन भी बैठक के दौरान हंगामा, तीखी बहस और कई महत्वपूर्ण फैसले हुए, लेकिन इसके बावजूद कुछ अहम एजेंडे अभी लंबित हैं।

विधायक काऊ की नसीहत, पार्षद रखें सीमित दखल

बैठक के दौरान रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने पार्षदों को स्वच्छता समितियों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि पूर्व में निगम में उजागर हुए स्वच्छता समिति वेतन फर्जीवाड़े में कई पार्षदों के नाम सामने आए थे, जिससे जनप्रतिनिधियों की छवि पर असर पड़ा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्षदों की भूमिका निगरानी और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने तक सीमित रहनी चाहिए, जबकि कर्मचारियों के वेतन और तैनाती जैसे प्रशासनिक मामलों की जिम्मेदारी सुपरवाइजर और सफाई निरीक्षकों पर ही छोड़नी चाहिए।

चुनावी वर्ष में विकास पर जोर

बोर्ड बैठक के दूसरे दिन रायपुर विधायक उमेश शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव का वर्ष होने के चलते शहर के हर वार्ड में विकास कार्य तेज किए जाने चाहिए। उन्होंने मेयर से आग्रह किया कि पार्षदों के माध्यम से अधिक से अधिक विकास कार्य कराए जाएं, ताकि जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।

सीट को लेकर आपसी टकराव

बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद अभिषेक तिवारी और पार्षद कोमल वोहरा के बीच सीट को लेकर विवाद हो गया। अभिषेक तिवारी के कोमल वोहरा की सीट पर बैठने से विवाद बढ़ा और अन्य पार्षदों ने महिला सम्मान को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में मामला शांत हुआ और तिवारी अपनी सीट पर लौटे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *