अस्पताल में सांसों पर संकट: बिजली गुल, वेंटिलेटर बंद, खतरे में पड़ी 10 बच्चों की जान; एंबू बैग से दी ऑक्सीजन

उत्तराखंड

दून अस्पताल में बिजली गुल हो गई। जनरेटर नहीं चला। इस दौरान वेंटिलेटर बंद हो गए और 10 बच्चों की जान खतरे में पड़ गई थी। मासूमों को एंबू बैग से ऑक्सीजन दी गई

दून अस्पताल में बिजली गुल हो गई। जनरेटर नहीं चला। इस दौरान वेंटिलेटर बंद हो गए और 10 बच्चों की जान खतरे में पड़ गई थी। मासूमों को एंबू बैग से ऑक्सीजन दी गई।

दून अस्पताल की इमरजेंसी में रात के समय अचानक बिजली जाने से 10 बच्चों की सांसों पर संकट खड़ा गया। जनरेटर का पैनल हैंग होने की वजह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह रुक गई। स्थिति यह हुई कि पीकू वार्ड के वेंटीलेटर बंद हो गए। तीन बच्चों को एंबू बैग से ऑक्सीजन देना पड़ा

इस दौरान अस्पताल में जमकर अफरा-तफरी मची रही। जानकारी के मुताबिक घटना बृहस्पतिवार रात करीब 11.20 बजे की है। इमरजेंसी-ओटी भवन की बिजली अचानक गुल हो गई। स्वास्थ्यकर्मियों को लगा कि ऑटोमैटिक जनरेटर शुरू हो जाएगा।

कुछ मिनट तक इंतजार करने के बाद भी जनरेटर नहीं चला तो आनन-फानन तकनीशियन को सूचना दी गई। जांच के बाद पता चला कि जनरेटर का पैनल हैंग हो गया है। उधर बिजली जाने के कुछ मिनट बाद ही पीकू वार्ड में लगे वेंटीलेटर बंद हो गए। वार्ड में कुल 10 बच्चे भर्ती थे।

वेंटीलेटर बंद हो गया तो उनकी सांसों पर संकट आ गया। डॉक्टरों ने बच्चों को फौरन एंबू बैग से ऑक्सीजन देना शुरू किया। एंबू बैग एक जीवनरक्षक चिकित्सा उपकरण है। इसका उपयोग आपातकालीन स्थिति में कृत्रिम सांस देने के लिए किया जाता है।

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