Uttarakhand: कॉकरोच रसोई में पका रहे बीमारियां, संपर्क में आने से लोग अस्थमा, रोज अस्पताल पहुंच रहे मामले

कॉकरोच रसोई में बीमारियां पका रहे हैं। संपर्क में आने से लोग अस्थमा, भोजन विषाक्त और त्वचा संबंधी रोगों की चपेट में आ रहे हैं। दून और कोरोनेशन अस्पताल में इस तरह की समस्याओं के साथ कई मरीज पहुंच रहे

कॉकरोच घरों की किचेन में बीमारियां पका रहे हैं। इसके शरीर से निकलने वाले अलग-अलग तरह के प्रोटीन लोगों में अस्थमा, भोजन विषाक्त और एलर्जिक डर्मेटाइटिस बीमारियों की वजह बन रहे हैं। गर्मियों में यह समस्या और अधिक बढ़ गई है। दून और जिला अस्पताल में हर रोज इस तरह के 15 से भी अधिक मामले आ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार कॉकरोच अधिक गर्मी और बारिश होने पर बाहर निकलते हैं। उनके शरीर से निकलने वाले कुछ विशेष तरह के प्रोटीन लोगों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पैदा करते हैं। इसमें बीएलए-जी प्रोटीन के सात विभिन्न प्रकार शामिल हैं। दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुण पांडेय के मुताबिक कॉकरोच के शरीर का हर हिस्सा हवा के माध्यम से शरीर में पहुंचकर बीमार कर सकता है

अक्सर देखा जाता है जब कॉकरोच मर जाता है तो उसके शरीर का टेग्मिना और प्रोनोटम टूटकर बिखर जाता है। यह परेशानी तब आती है जब सिलिंडर, डैसबोर और अन्य छिपे हुए हिस्सों में जब कॉकरोच मरते हैं। ऐसी स्थिति में टेग्मिना और प्रोनोटम लंबे समय तक वहां पर पड़े रहते हैं। जो बेहद हानिकारक हैं। इसके अलावा जिंदा कॉकरोच भी कई बार बाहर से गंदगी लेकर आते हैं और खाने को दूषित कर देते हैं। इसकी वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने के साथ कई तरह कर परेशानी हो सकती है।

उधर जिला अस्पताल के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल आर्य बताते हैं कि कॉकरोच से निकलने वाले प्रोटीन के संपर्क में आकर त्वचा में गंभीर एलर्जी हो जाती है। इसकी वजह से एग्जिमा, एलर्जिक डर्मेटाइटिस, खुजली, लाल चकत्ते और जलन पड़ने जैसे लक्ष्रण दिख सकते हैं। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी होगी।

ऐसे करें बचाव

1- कॉकरोच को मारने के लिए छिड़काव करें

2- मरे हुए कॉकरोच को जल्द से जल्द घर से बाहर

3- कॉकरोच के शरीर के हिस्सों को स्पर्श करने से बचें

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