देहरादून। किन्नर समाज की ‘बधाई’ को लेकर दून में सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम की बोर्ड बैठक में शादी और जन्म जैसे शुभ अवसरों पर किन्नरों की ओर से ली जाने वाली बधाई की अधिकतम सीमा 5100 रुपये तय करने के फैसले के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया आदेश ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है।
जबरन वसूली पर अंकुश
नगर निगम का उद्देश्य जबरन वसूली पर अंकुश लगाना था, जिसे ध्यान में रखते हुए एक निश्चित धनराशि तय कर दी गई। जबकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट बधाई या जजमानी के नाम पर धन वसूली को मौलिक अधिकार मानने से इन्कार करते हुए किसी भी तरह की जबरन वसूली को अवैध करार दे चुका है।
ऐसे में अब यह पूरा मामला कानूनी दायरे में भी आ सकता है। नैनीताल हाईकोर्ट के अधिवक्ता शिवा वर्मा के मुताबिक बीते 15 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बधाई के नाम पर जबरन पैसे वसूलना गैरकानूनी है।
अदालत ने ‘ये मेरा इलाका’ जैसी प्रथा को भी खारिज करते हुए कहा था कि इस तरह की वसूली अपराध की श्रेणी में आ सकती है। अब सवाल यह भी उठता है कि नगर निगम की ओर से अधिकतम बधाई धनराशि तय कर इस प्रथा को वैध की श्रेणी में ला दिया गया है।
नगर निगम के फैसले के समर्थन में एक गुट
उत्तरांचल प्रेस क्लब में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में किन्नर समाज के एक गुट की प्रतिनिधि करिश्मा राजपूत ने नगर निगम के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 5100 रुपये की सीमा तय होने से आम लोगों को राहत मिलेगी और जबरन वसूली पर लगाम लगेगी।
उनका कहना था कि कुछ लोगों की वजह से पूरे समाज की छवि खराब होती है, ऐसे में सभी को इस निर्णय का पालन करना चाहिए। करिश्मा राजपूत ने आरोप लगाया कि कुछ गुट अपने-अपने क्षेत्रों का बंटवारा कर लेते हैं, जिससे आपसी विवाद बढ़ते हैं।
उन्होंने बताया कि 2019 में सरकार ने ट्रांसजेंडर पोर्टल शुरू कर पंजीकरण और पहचान पत्र जारी करने की व्यवस्था की थी, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई समस्याएं बनी हुई हैं।
विरोध में हाईकोर्ट जाने की तैयारी
दूसरी ओर, उत्तराखंड सरकार में दर्जाप्राप्त किन्नर नेता रजनी रावत ने 5100 रुपये की सीमा तय करने का विरोध किया है।
उन्होंने महापौर सौरभ थपलियाल से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और स्पष्ट किया कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगीं। उन्होंने तर्क दिया कि कोई अपनी इच्छानुसार बधाई के रूप में कितनी भी धनराशि दे सकता है।