देहरादून। ऋण घोटाले के बाद अर्बन कोआपरेटिव बैंक (यूसीबी) पर आरबीआइ ने 12 फरवरी 2026 के आदेश के क्रम में छह माह का प्रतिबंध लगा दिया था। जिसके चलते खातों पर निकासी पर भी रोक है। बैंक के सात हजार से अधिक खातेदारों के 124 करोड़ रुपये फंसे हैं और वह पाई-पाई को मोहताज हो रखे हैं।
वहीं, दूसरी तरफ बैंक प्रबंधन ने अपने हित में जुगाड़ निकाल लिया। बैंक अधिकारियों ने सचिव से लेकर चपरासी तक का वेतन कैश में प्राप्त कर लिया। ताकि सैलरी क्रेडिट होने के बाद भी खातों के प्रतिबंध का उन पर असर न पड़े।
बैंक की इस मनमर्जी को देखते हुए खातेदारों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बड़ी संख्या में खातेदार बैंक में पहुंचे और जमकर हंगामा किया।
खातेदारों ने सवाल उठाए की बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कैश में सैलरी कैसे निकाल ली। पूछा कि क्या इसके लिए आरबीआइ से अनुमति ली गई। अधिकारी इसका कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। जिससे खातेदारों का गुस्सा और भड़क उठा। उन्होंने बैंक की जांच के लिए गठित एसआइटी से मांग की कि बैंक में हर तरह की अनियमितता में शामिल अधिकारियों के विरुद्ध शीघ्र मुकदमा दर्ज किया जाए।
चपरासी का वेतन 24 हजार और क्लर्क का 20 हजार
जिस रसीदी टिकट वाले पर्चे पर कैश में ली गई सैलरी का विवरण दर्ज है, उसको लेकर भी खातेदारों ने सवाल उठाए हैं। यहां तक कि कर्मचारियों की भर्ती और वेतन निर्धारण में भी मनमर्जी के आरोप लगाए गए हैं।
इसी वेतन पर्चे के अनुसार चपरासी का वेतन 24 हजार से अधिक दर्शाया गया है, जबकि क्लर्क को 20 हजार ही दिए जा रहे हैं। आरोप लगाए गए हैं कि प्रबंधन ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को ही अधिक नौकरी पर रखा है। यहां तक कि घर के केयरटेकर को भी बैंक से वेतन दिया जा रहा है।
सचिव बीरबल ने आरबीआइ पर फोड़ा ठीकरा
जब खातेदार बैंक के सचिव बीरबल पर अपनी हताशा का गुस्सा निकाल रहे थे, तब किसी ने इस आरोप-प्रत्यारोप का वीडियो भी बना लिया। जिसमें सचिव कह रहे हैं कि बैंक में जो घोटाला उजागर हुआ है, वह वर्ष 2013 का है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि आरबीआइ निरंतर आडिट करता रहा है। यदि समय रहते घपला उजागर नहीं हुआ तो इसके लिए आरबीआइ अधिकारियों की लापरवाही वजह है।
सचिव की डिग्री पर उठे सवाल
एक वीडियो में खातेदार स्काहिव बीरबल की कार्य क्षमता और शैक्षिक योग्यता पर भी सवाल उठा रहे हैं। जिसमें बीरबल कहते नजर आ रहे हैं कि वह स्नातक हैं और प्रबंधन ने उन्हें जबरन इस कुर्सी पर बैठाया। इसके अलावा वह स्नातक में अपने विषयों को लेकर सिविक्स, इकोनामिक्स को एक ही बताते हुए अटपटे जवाब दे रहे हैं। जिसको लेकर खातेदार उन्हें सवालों के कठघरे में भी खड़ा कर रहे हैं।
आडिट की फीस दो लाख से सीधे 12 लाख
रिन घोटाले के बाद डूबने के कगार पर खड़े यूसीबी में भुगतानों को लेकर भी गंभीर अनियमितता के आरोप लग रहे हैं। यह बात सामने आई है कि बैंक ने जिस आडिट के लिए वरष 2022-23 से 2023-24 तक सालाना दो से ढाई लाख रुपये भुगतान किया, वह 2024-25 में बढ़कर सीधे 12 लाख पहुंच गया।
बर्खास्त कार्मिक को बनाया मुख्य लेखाकार
यूसीबी के मुख्य लेखाकार अजय गौड़ की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप प्रबंधन पर लगाए गए हैं। खातेदारों का आरोप है कि मुख्य लेखाकर अजय गौड़ को घपले के चलते ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स ने वर्ष 2021 में बर्खास्त कर दिया था। वहीं, यूसीबी ने ऐसे कार्मिक को मुख्य लेखाकार की जिम्मेदारी सौंप दी।