देहरादून। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत गणेशपुर से डाटकाली तक बनाई गई 12 किमी एलिवेटेड रोड पूरी परियोजना का सबसे आकर्षक भाग है।
यह एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है और इस पर सफर करते हुए फर्राटा भरना यात्रियों को रोमांच से भर देते है। लेकिन, इसका दूसरा पहलू भी है, जो इसके निर्माण की चुनौतियों से जुड़ा है। परियोजना से जुड़े भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के इंजीनियरों और श्रमिकों ने मंगलवार को जागरण के साथ निर्माण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
हाथियों से लेकर गुलदार, बाघ आदि वन्यजीवों का गलियारा
इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुनने परियोजना से जुड़े तमाम इंजीनियर और श्रमिक भी पहुंचे थे। इंजीनियर मनोज कुमार ने कहा कि 12 किमी एलिवेटेड रोड का निर्माण सिर्फ इसलिए किया गया कि यहां हाथियों से लेकर गुलदार, बाघ आदि वन्यजीवों के गलियारे हैं। लिहाजा, निर्माण के दौरान हमेशा वन्यजीवों का खतरा मंडराता रहता था। कई बार गुलदार से भी आमना सामना भी हुआ। गनीमत रही कि उसने कभी हमला नहीं किया।
वहीं, इंजीनियर राहुल सिंह और आशीष रावत ने बताया कि इस कॉरिडोर में 24 घंटे कार्य की अनुमति नहीं थी। कोर्ट के आदेश के अनुरूप शाम 06 बजे तक हर हाल में काम समाप्त कर लौटने की बाध्यता रहती थी। ऐसे में साइट को वन्यजीवों की स्वछंदता के लिए साफ भी रखना पड़ता था।
मोबाइल का नेटवर्क न होने से आर्डर देने में आती थी मुश्किल
निर्माण से जुड़े इंजीनियरों ने बताया कि एलिवेटेड रोड वाले सेक्शन में मोबाइल नेटवर्क ठप रहते थे। ऐसे में निर्माण सामग्री के आर्डर और अन्य जरूरत के लिए बाइक से लंबा सफर तय करना पड़ता था। किसी इमरजेंसी के दौरान भी काफी मुश्किल आती थी