देहरादून। तेजी से फैलते शहर और बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना दून के लिए आने वाले वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण यातायात परियोजना बनकर उभर रहा है।
करीब 6200 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कारिडोर रिस्पना और बिंदाल नदी के ऊपर विकसित होगा। इसके पूरा होने पर हरिद्वार बाईपास व कारगी से मसूरी रोड तक का सफर जहां तेज होगा, वहीं शहर के मुख्य मार्गों पर लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी।
निरंतर बढ़ रही जाम की चुनौती
राजधानी दून में निरंतर बढ़ती ट्रैफिक जाम की चुनौती को दूर करने के लिए सरकार रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट पर तेजी से आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष बजट में इस परियोजना के लिए फौरी तौर पर 350 करोड़ रुपये का प्राविधान भी किया है। ताकि डीपीआर, सर्वे और जमीन अधिग्रहण की कागजी कार्रवाई को धरातल पर आगे बढ़ाया जा सके।
क्योंकि, दोनों नदियों के प्रस्तावित कारीडोर पर बड़े स्तर पर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है व अतिक्रमण वाले हिस्सों पर रह रहे व्यक्तियों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी है। चूंकि, परियोजना का निर्माण अब एनएचएआइ करेगा, लेकिन, उन्हें जमीन खाली कर राज्य सरकार को ही मुहैया करानी है। अब आरंभिक बजटीय व्यवस्था से शुरुआती कार्यों को गति मिल सकेगी।
अधिकतम जल स्राव से 20 प्रतिशत अधिक पर डिजाइनिंग
रिस्पना और बिंदाल नदी पर बनने वाली एलिवेटेड रोड को नदी के बीचोंबीच सिंगल पिलर पर खड़ा किया जाएगा। ऐसे में इसके ढांचों की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
भले ही अभी दोनों नदियों में पानी का डिस्चार्ज (स्राव) ना के बराबर हो, लेकिन यहां बीते 100 वर्षों में अधिकतम डिसचार्ज क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड के रिकार्ड को ध्यान में रखा गया है। ढांचों को अधिकतम डिसचार्ज से 20 प्रतिशत अधिक पर खड़ा किया जाएगा।
इन इलाकों को सबसे ज्यादा मिलेगी राहत
एलिवेटेड रोड बनने के बाद घंटाघर, सहारनपुर रोड, बल्लूपुर, राजपुर रोड, हरिद्वार रोड, आईएसबीटी, प्रिंस चौक और जाखन क्षेत्र में ट्रैफिक दबाव कम होने की संभावना है। खासकर मसूरी, हरिद्वार और दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर कम समय लगेगा।
व्यापार और पर्यटन को भी मिलेगा सीधा लाभ
शहर के व्यापारिक क्षेत्रों में माल ढुलाई तेज होगी और बाहरी राज्यों से आने-जाने वाले व्यावसायिक वाहनों को सुगम मार्ग मिलेगा। मसूरी और चारधाम की ओर जाने वाले पर्यटकों के लिए भी यात्रा आसान होगी। पर्यटन सीजन में शहर के भीतर जाम कम होने से स्थानीय कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
दून के भविष्य की ट्रैफिक रीढ़
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण नहीं, बल्कि देहरादून के भविष्य के यातायात ढांचे को नया आकार देने वाली पहल है। आने वाले वर्षों में वाहनों की संख्या बढ़ने के बीच यह कॉरिडोर शहर के लिए स्थायी समाधान साबित हो सकता है।
आपात सेवाओं के लिए भी बड़ी राहत
एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसी आपात सेवाओं को वैकल्पिक तेज कारिडोर मिलेगा। अस्पतालों और प्रमुख संस्थानों तक पहुंचने में लगने वाला समय कम होगा।