उत्तराखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों-गर्भवतियों को मिल रहा घटिया खाना, लैब रिपोर्ट ने खोली पोल

देहरादून। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को बांटी जा रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फार टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्री (एनएबीएल) प्रमाणित लैब रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल की छापेमारी के बाद भगवानपुर में गोदाम से लिए गए चिप्स, खजूर व अंडों के नमूनों की जांच में सामने आया कि कई खाद्य पदार्थ न सिर्फ गुणवत्ता मानकों पर फेल हैं, बल्कि पैकेटों पर निर्माण तिथि और बैच नंबर में भी बड़े स्तर पर हेरफेर की गई है।

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग उत्तराखंड की ओर से किए गए अनुबंध के बाद दिल्ली की मैसर्स अर्थव इंटरप्राइजेज की ओर से राज्य के सभी जनपदों में 105 बाल विकास परियोजनाओं को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है।

सभी नमूनों को मिसब्रांडेड घोषित किया

लैब रिपोर्ट के अनुसार चिप्स और खजूर के सभी नमूनों को मिसब्रांडेड घोषित किया गया है। पैकेटों पर अंकित निर्माण तिथि और एक्सपायरी संबंधी विवरण या तो अस्पष्ट पाए गए या उनमें सीधे बदलाव किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कई पैकेटों पर फरवरी-2025 की निर्माण तिथि को मिटाकर मार्कर से फरवरी-2026 अंकित किया गया था।

इससे पुराने स्टाक को नई तिथि देकर केंद्रों पर सप्लाई किए जाने की आशंका जताई गई है। केले के चिप्स की गुणवत्ता परीक्षण में अनुबंधित मानकों से सीधा विचलन पाया गया है। अनुबंध के अनुसार चिप्स में ट्रांसफैट शून्य होना चाहिए था, लेकिन लैब में प्रति 100 ग्राम चिप्स में 1.30 ग्राम ट्रांसफैट मिला।

प्रोटीन की मात्रा भी तय 3.1 ग्राम के बजाय केवल 2.5 ग्राम पाई गई। अंडों की जांच में भी निर्धारित गुणवत्ता नहीं मिली। वितरण के लिए न्यूनतम 45 ग्राम वजन तय है, लेकिन अधिकांश अंडे निर्धारित वजन से कम मिले। इससे पोषण आपूर्ति के मानकों पर और सवाल गहरे हो गए हैं।

जिलाधिकारी देहरादून ने भगवानपुर में गोदाम पर जब छापा मारा था तो उसके बाद मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई। अगर, सैंपलों की कोई लैब जांच रिपोर्ट आई है तो इसकी जानकारी अभी मुझे नहीं है। -चंद्रेश कुमार, सचिव महिला एवं बाल सशक्तीकरण विभाग

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग उत्तराखंड की ओर से किए गए अनुबंध के बाद दिल्ली की मैसर्स अर्थव इंटरप्राइजेज की ओर से राज्य के सभी जनपदों में 105 बाल विकास परियोजनाओं को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है

सभी नमूनों को मिसब्रांडेड घोषित किया

लैब रिपोर्ट के अनुसार चिप्स और खजूर के सभी नमूनों को मिसब्रांडेड घोषित किया गया है। पैकेटों पर अंकित निर्माण तिथि और एक्सपायरी संबंधी विवरण या तो अस्पष्ट पाए गए या उनमें सीधे बदलाव किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कई पैकेटों पर फरवरी-2025 की निर्माण तिथि को मिटाकर मार्कर से फरवरी-2026 अंकित किया गया था।

इससे पुराने स्टाक को नई तिथि देकर केंद्रों पर सप्लाई किए जाने की आशंका जताई गई है। केले के चिप्स की गुणवत्ता परीक्षण में अनुबंधित मानकों से सीधा विचलन पाया गया है। अनुबंध के अनुसार चिप्स में ट्रांसफैट शून्य होना चाहिए था, लेकिन लैब में प्रति 100 ग्राम चिप्स में 1.30 ग्राम ट्रांसफैट मिला।

प्रोटीन की मात्रा भी तय 3.1 ग्राम के बजाय केवल 2.5 ग्राम पाई गई। अंडों की जांच में भी निर्धारित गुणवत्ता नहीं मिली। वितरण के लिए न्यूनतम 45 ग्राम वजन तय है, लेकिन अधिकांश अंडे निर्धारित वजन से कम मिले। इससे पोषण आपूर्ति के मानकों पर और सवाल गहरे हो गए हैं

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