देहरादून। केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक के निर्माण, बिक्री और इसके उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग तब अधिक खतरनाक हो जाता है, जब उसमें खाद्य पदार्थ रखे जाएं और खासकर गर्म खाद्य पदार्थ। लेकिन, राजधानी दून में होटल, रेस्तरां, ढाबे और स्ट्रीट फूड के स्टाल इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रतिष्ठान संचालक खुलेआम गर्म खाद्य पदार्थ न सिर्फ सिंगल यूज प्लास्टिक में पैक करके दे रहे हैं, बल्कि परोसने के लिए भी ऐसे ही प्लास्टिक का प्रयोग किया जा रहा है।
होम डिलीवरी के लिए दिए जाने वाले डिब्बों की भी निम्न गुणवत्ता
आज की भागदौड़भरी दिनचर्या में बड़ी संख्या में लोग स्विगी और जोमैटो जैसे आनलाइन फ़ूड डिलीवरी प्लेटफार्म पर निर्भर हैं। अधिकतर रेस्तरां इनसे जुड़े हैं। भोजन की झटपट डिलीवरी मन को जितना सुकून देती है, उनकी पैकिंग सेहत के लिए उतनी ही खतरनाक है। अधिकतर रेस्तरां निम्न गुणवत्ता के प्लास्टिक के डिब्बों, पैकिंग प्लेट्स और मल्टी लेयर्ड प्लास्टिक के साथ भोजन की डिलीवरी कर रहे हैं। यहां तक कि भोजन की डिलीवरी में बेधड़क प्लास्टिक के चम्मच और फोर्क दिए जा रहे हैं।
इसलिए खतरनाक है सिंगल यूज प्लास्टिक में खाद्य पदार्थों की डिलीवरी
जब गर्म खाना निम्न गुणवत्ता के प्लास्टिक के संपर्क में आता है तो उसमें मौजूद केमिकल खाने में मिलने लगते हैं। इसे केमिकल लीचिंग कहते हैं। खासकर ऐसे प्लास्टिक से बीपीए (बिस्फेनाल ए), फ्थैलेट्स, स्टाइरीन जैसे हानिकारक केमिकल निकलते हैं। अल्प प्रयोग पर इससे पेट दर्द, उल्टी, गैस, एसिडिटी की समस्या हो सकती है। वहीं, लंबे समय तक प्रयोग से हार्मोन में गड़बड़ी, फर्टिलिटी पर असर, कैंसर जोखिम के साथ ही लिवर और किडनी पर दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।
मल्टी लेयर्ड थैली के नाम पर भी खेल
कई रेस्तरां सुरक्षित पैकिंग का हवाला देते हुए चमकीली चांदी जैसी थैली का प्रयोग भोजन की पैकिंग के लिए करते हैं। इसे फॉयल पैक भी कहा जाता है। हालांकि, अधिकतर थैलियां पूरी तरह एल्युमिनियम वाली नहीं होती हैं। इसमें बीच मे एल्युमिनियम फॉयल होता है और भीतर की परत प्लास्टिक की होती हैं। साथ ही बाहर फिर से प्लास्टिक या प्रिंटेड लेयर होती है। इस तरह ही थैलियों में गर्म खाना डालने पर भीतर की लेयर पिघलकर केमिकल छोड़ती है।
खाद्य पदार्थों के लिए यह विकल्प उपयोग
प्लास्टिक के डिब्बे मजबूत होने चाहिए।
डिब्बों को फूड ग्रेड (भारतीय मानक ब्यूरो/एफएसएसएआइ अधिकृत) होना चाहिए।
प्लास्टिक रेयूजेबल या रिसाइक्लेबल होना चाहिए।
प्लास्टिक की जगह बगास (गन्ने के रेशे) के बाक्स उपयोगी।
पेपर फूड ग्रेड पैकेजिंग बेहतर
पत्तल/दोना उपयोगी।