उत्तराखंड में कई परिवारों तक नहीं पहुंच रहा पानी, दूषित जल के भरोसे गांव के लोग

ऋषिकेश। बिजली-पानी किसी भी नागरिक के जीवन की मूलभूत आवश्यकता होती है। उच्चतम न्यायालय द्वारा भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि बिजली-पानी से किसी भी परिवार को वंचित नहीं रखा जा सकता। मगर, इन सबके बीच ऋषिकेश से लगी ग्रामसभा गुमानीवाला में कई परिवार सरकारी सिस्टम की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।

इन परिवारों को कई साल से जल संस्थान ने न पेयजल कनेक्शन दिया है और न ही इन्हें पानी पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की। नतीजा, ये परिवार कई सालों से बोरवेल से निकल रहे दूषित पानी के भरोसे हैं।

दरअसल, नगर निगम ऋषिकेश से लगी ग्रामसभा गुमानीवाला में वार्ड-14 में हिमालयन पीठ संस्थान के समीप 25 से अधिक परिवारों को जल संस्थान द्वारा पेयजल कनेक्शन से अब तक नहीं जोड़ा गया है।

इस क्षेत्र में जलापूर्ति की व्यवस्था के लिए गुमानीवाला क्षेत्र में नया ओवरहेड टैंक स्वीकृत है, लेकिन टैंक की भूमि, वनभूमि है, जिसका अनापत्ति प्रमाण-पत्र वन विभाग द्वारा अब तक जारी नहीं हो सका है। इससे यह टैंक निर्माण अधर में फंसा है।

वार्ड सदस्य अशोक थापा ने कहा कि पानी की आवश्यकता पूरी करने के लिए इन परिवारों ने बोरवेल तो लगाया, लेकिन बोरवेल से निकल रहे पानी की गुणवत्ता खराब है।

कई बार अधिक दूषित पानी मिलता है, जिससे पीने को भी पानी नसीब नहीं हो पाता। ये परिवार जल संस्थान कार्यालय श्यामपुर के चक्कर लगा कर थक चुके हैं, अब तक इन्हें पेयजल कनेक्शन नहीं मिल सके हैं।

स्वच्छ पानी मुहैया कराने की जिम्मेदारी से झाड़ा पल्ला

ताज्जुब की बात है कि जल संस्थान के अधिकारी इन परिवारों को कनेक्शन न होने के कारण अपना उपभोक्ता मानने से भी मना कर रहे हैं। ऐसे में इन परिवारों को फिलहाल स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने में भी असमर्थ बता रहे हैं। ऐसे में ये परिवार कई साल से दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

वहीं, सरकार द्वारा हर व्यक्ति व परिवार को साफ पानी मुहैया कराने के लिए जल जीवन मिशन व हर घर नल योजना चलाई जा रही है, लेकिन गुमानीवाला में परिवारों की मांग पर भी पेयजल कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं। ऐसे में जल संस्थान द्वारा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर भी पलीता लगाया जा रहा है।

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