देहरादून। दून शहर में अब गड्ढे सड़क पर नहीं, सड़कें गड्ढों में बदल चुकी हैं। शहर में खोदाई का यह अराजक तंत्र अब शहर की रफ्तार ही नहीं रोक रहा, बल्कि सीधे-सीधे जनता की जान से खेल रहा है। पूरा शहर खोदाई का शिकार बना पड़ा है, जनता सड़क के सहारे नहीं बल्कि किस्मत के सहारे चल रही है। इस समय ऐसा कोई इलाका नहीं बचा जो खोदाई की मार से अछूता हो।
पूरे शहर में सीवर, पेयजल व भूमिगत विद्ययुत लाइन समेत विभिन्न परियोजनाओं की अनियोजित और अंधाधुंध खोदाई से सड़कें जानलेवा बन चुकी हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब तक शहर की जनता इस ””आपदा”” जैसी अव्यवस्था का शिकार होती रहेगी। खोदाई के कार्यों में मनमानी कर रहीं एजेंसियों पर डीएम की कार्रवाई व चेतावनियों का भी कोई असर नहीं दिख रहा है।
दिल्ली में दो दिन पहले ही गड्ढ़े में गिरने से उत्तराखंड के पौड़ी निवासी युवक की मृत्यु हो गई थी। इससे कुछ दिन पहले नोएडा में इसी तरह एक इंजीनियर की भी मृत्यु हुई थी। अब उसी तर्ज पर देहरादून शहर भी खोदाई के खतरे का शहर बनता जा रहा है। सरस्वतीपुरम मियांवाला में बुजुर्ग के सीवर लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरने से बुरी तरह घायन होने की घटना ने साफ कर दिया है कि जगह-जगह सड़कों के चीरफाड़ ने किस तरह शहरवासियों की जान जोखिम में डाली हुई है, मगर निर्माण एजेंसियों की मनमानी पर न तो प्रशासन की सख्ती असर दिखा पा रही है और न ही जिम्मेदारी का कोई भाव नजर आ रहा है।
सरस्वतीपुरम में में हुई घटना के बाद केवल बुजुर्ग कमलनयन का परिवार ही नहीं बल्कि क्षेत्र के लोग भी सदमे में हैं और प्रशासनिक लापरवाही पर उनमें उबाल नजर आ रहा है। यह हाल सिर्फ एक अकेले सरस्वतीपुरम का नहीं है, बल्कि पूरे शहर का है। दून की सड़कों पर फैल रही यह अव्यवस्था किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की अनदेखी का सीधा नतीजा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदार एजेंसियों का गंभीर श्रेणी का अपराध है।