उत्तराखंड के इस शहर में पालतू कुत्ता छोड़ा तो देना होगा 20 हजार जुर्माना, नए नियम जारी

देहरादून। शहर में पालतू कुत्तों और आवारा कुत्तों को लेकर बढ़ती शिकायतों, जनसुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बीच नगर निगम ने अब कुत्तों से जुड़ी संशोधित उपविधि को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया है। नए नियमों के तहत अब कोई भी पालतू कुत्ता छोड़ना गंभीर अपराध माना जाएगा, जिस पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना और एफआईआर दर्ज की जा सकेगी।

वहीं, कुत्ते के काटने, खुले में घूमाने, पंजीकरण न कराने और वैक्सीनेशन में लापरवाही पर भी कड़ी कार्रवाई तय की गई है। नगर निगम की ओर से यह उपविधि पहले 15 दिसंबर को जारी की गई थी, जिसके बाद एक माह तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। इस दौरान 21 सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुईं। इनका निस्तारण करने के बाद कुछ प्रावधानों में आंशिक संशोधन कर अब फाइनल बायलाज लागू कर दिया गया है।

आरडब्ल्यूए की भी तय हुई जिम्मेदारी

नगर निगम के नए नियमों के अनुसार, हाउसिंग सोसाइटी में पाले जा रहे सभी कुत्तों की जानकारी आरडब्ल्यूए को नगर निगम को देनी होगी। पंजीकरण, वैक्सीनेशन और नसबंदी सुनिश्चित करनी होगी, नियमों का पालन न होने पर आरडब्ल्यूए को नोटिस जारी किया जाएगा।

पांच या अधिक कुत्ते तो शेल्टर का लाइसेंस जरूरी

पांच या उससे अधिक कुत्ते रखने पर प्राइवेट डाग शेल्टर के रूप में पंजीकरण अनिवार्य होगा। पशु कल्याण बोर्ड के साथ ही नगर निगम में पंजीकरण कराना होगा, जिसका वार्षिक शुल्क तीन हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, हर पेट शाप का भी नगर निगम में पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके लिए वार्षिक शुल्क 2000 रुपये तय किया गया है। दोनों ही मामलों में पंजीकरण के लिए छह माह का समय दिया जाएगा।

बनाए गए हैं नियम

– तीन माह या उससे अधिक आयु के हर पालतू कुत्ते का पंजीकरण अनिवार्य

– पंजीकरण की वैधता एक वर्ष

– एंटी रेबीज टीकाकरण की वैधता खत्म होने पर लाइसेंस स्वतः निरस्त

– बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर कड़ी कार्रवाई

– सार्वजनिक स्थानों पर बिना पट्टा, मुंहबंद और निगरानी ले जाना प्रतिबंधित

खूंखार नस्लों पर विशेष सख्ती

पिटबुल, राटवीलर, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडाग आदि खूंखार कुत्तों के लिए 2000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क रखा गया है। एक वर्ष की आयु के बाद नसबंदी अनिवार्य की गई है और इन नस्लों की ब्रीडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध है। पहले से मौजूद कुत्तों के लिए तीन माह में खरीद व नसबंदी प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है।

इन स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर कार्रवाई

स्कूल, धर्मस्थल, भीड़भाड़ वाले क्षेत्र, कालोनी के प्रवेश-निकास बिंदु, बच्चों व बुजुर्गों के आवागमन वाले स्थान।

 

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