देहरादून : लक्सर में सरेआम हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर फरार हुए बदमाशों ने एक बार फिर पुलिस की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कानून की पकड़ ढीली हो रही है या अपराधी तेज हो गए हैं।
प्रदेश में पहले भी कई ऐसी आपराधिक घटनाएं हुई हैं, जिसने पुलिस की नाकामी की पोल खोली है। अक्सर पुलिस का निशाना बदमाशों के घुटनों पर स्टीक लगता है, जबकि लक्सर में दिनदहाड़े फायरिंग कर फरार हुए बदमाशों के साथ ऐसा नहीं हो पाया।
बुधवार को लक्सर में पेशी के दौरान पुलिस सुरक्षा के बावजूद दो बदमाशों ने मेरठ के हिस्ट्रीशीटर पर गोलियां दाग दीं और पैदल ही फरार हो गए। उनके पीछे आधुनिक हथियारों से लैस पुलिसकर्मी भागते दिखाई दिए। बदमाश वहां से निकल गए, जिसके बाद यह घटना पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बनी रही। पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी दबी जुबान से कह रहे हैं कि नये जमाने की पुलिस है, कुछ भी कर सकती है। यह घटना पुलिस के सामने बड़ा सवाल छोड़ गई है।
मसूरी की घटना ने भी उठाए थे कई सवाल
21 जनवरी 2024 को मसूरी में बदमाश को पकड़ने के लिए पहुंची दून पुलिस के एक दारोगा को आरोपित ने गोली मार दी थी। दारोगा बिना बुलेटप्रुफ जैकेट पहने बदमाश को पकड़ने के लिए निकल गए। दारोगा के पेट में गोली मारने के बाद बदमाश वहां से फरार हो गया। पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेट लगाकर उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन फिर भी वह नहीं पकड़ा जा सका। मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। एक बार फिर लक्सर में हुई घटना ने पुलिस की सक्रियता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।