Igas: देहरादून में बिखरा इगास का उल्लास, लोकनृत्य कर खेला भैलो

देहरादून! लोकपर्व इगास यानी बूढ़ी दिवाली का उल्लास दून में चहुंओर बिखरा। विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से पारंपरिक व सांस्कृतिक आयोजनों से शाम रोशन हुई। वाद्य यंत्रों की धुन पर पारंपरिक लोकनृत्य की प्रस्तुति, पहाड़ी व्यंजनों की खुशबू व भैलो की रोशनी पर लोग ”भैलो रे भैलो, अंध्यरो भजैकि उज्यलो देलो” का गयान कर खुशी से झूमे। आम से खास लोगों ने इस पर्व को मनाते हुए एक दूसरे को बधाई दी। पकोड़े और स्वाले बनाकर एक दूजे को भेंट किए

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को लोकपर्व इगास मनाया जाता है। ऐसे में शनिवार सुबह से ही लोग घरों में तैयारियों में जुट गए। पारंपरिक पकवान में उड़द की दाल की पकोड़ी, स्वाले बनाए। गोवंश की धूप, तिलक, फूलों की माला पहनाकर पूजा की। इसके बाद झंगोरा, भात का पींडू यानी पौष्टिक आहार बनाकर खिलाया। रात को दीये जलाकर घरों को रोशन किया। युवा पीढ़ी को पहाड़ की संस्कृति व परंपराओं से रूबरू कराने के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों की ओर से भव्य रूप से इगास मनाया गया। कलाकारों ने सांस्कृतिक गीत व नृत्य की प्रस्तुति दी। विभिन्न स्टाल पर लोग ने पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। रात को भैलो खेलकर उत्तराखंड की लोकसंस्कृति का भी संदेश दिया

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