देहरादून। उत्तरकाशी की घटना यह सीख देती है कि नदी किनारे अवैध निर्माण किस कदर जान पर भारी पड़ सकते हैं। क्योंकि, वहां एक निर्माणाधीन होटल के अतिवृष्टि की चपेट में आने से नौ मजदूर उसकी जद में आ गए।
राजधानी देहरादून में जहां चौतरफा आबादी का दबाव बढ़ रहा है और निर्माण की भी बाढ़ आ रखी है, वहां जरा सी असावधानी बहुत बड़ी त्रासदी ला सकती है। लिहाजा, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने आदेश जारी किया है कि नदी खड़े किए गए और खड़े हो रहे भवनों की तत्काल जांच शुरू कर दी जाए। जहां भी निर्माण मानकों के विपरीत पाए जा रहे हैं, उन्हें सील किया जाए।
एमडीडीए उपाध्यक्ष के आदेश के क्रम में रविवार को ही सचिव एमएस बर्निया से लेकर अन्य अधिकारी और अभियंता जांच में जुट गए हैं। सचिव बर्निया ने विभिन्न नदी क्षेत्रों के दौरा कर तमाम भवनों की स्थिति देखी। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, उपाध्यक्ष तिवारी ने कहा कि नदी किनारे खड़े भवनों, होटल, रिसार्ट के निर्माण में यदि मानकों की अनदेखी की जाती है, तो उससे जानमाल की भारी क्षति हो सकती है। क्योंकि, ऐसे क्षेत्रों में तेज वर्षा या बादल फटने की स्थिति में तेज बहाव और मलबा भारी क्षति पहुंचा सकता है। उन्होंने दो टूक कहा कि नदी किनारे नियम विरुद्ध खड़े भवनों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे भवनों या प्रतिष्ठानों को सील किया जाना जरूरी है।