कैंसर का शक, किडनी भी नहीं सही…’ तहव्वुर राणा ने बनाया था 33 बीमारियों का बहाना

नई दिल्ली। आतंकी तहव्वुर राणा किसी भी तरह से भारत नहीं आना चाहता था। उसने हर हथकंडा अपनाया। मगर काम नहीं आया। बस उसे इतना ही हासिल हो सका कि प्रत्यर्पण में भारत को देरी का सामना करना पड़ा। मगर अब तहव्वुर राणा भारतीय एजेंसियों के शिंकजे में है। तहव्वुर राणा ने अपने प्रत्यर्पण को रोकने की खातिर हर कानूनी दांव पेंच को अपनाया।

प्रत्यर्पण के खिलाफ पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट

फरवरी में पीएम मोदी के सामने डोनाल्ड ट्रंप ने राणा को भारत भेजने का एलान किया था। इसके बाद उसने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के सामने भारत न भेजने की अपील की थी। उसने दावा किया था कि वह पाकिस्तान मूल का है। इस वजह से उसे वहां प्रताड़ित किया जा सकता है। मगर सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील को खारिज कर दिया।

वकील ने लिखा पत्र- 33 बीमारियों का दिया हवाला

तहव्वुर राणा के वकील जॉन डी क्लाइन ने 21 जनवरी 2025 को अमेरिकी विदेश विभाग को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने प्रत्यर्पण रोकने की कोशिश की। इसके पीछे 33 से अधिक स्वास्थ्य कारणों और भारत में मिलने वाली यातनाओं का हवाला दिया। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने उनकी एक नहीं सुनी। क्लाइन ने कहा कि तहव्वुर राणा को भारत की जेलों में प्रताड़ित किया जा सकता है। वहां की जेलों की स्थिति अमानवीय है। मुकदमे के इंतजार में राणा स्वास्थ्य कारणों से भारत में ही मर सकता है।

कैंसर का भी जताया शक… मगर नहीं बनी बात

वकील ने तर्क दिया कि भारत भेजने पर राणा को यातना झेलनी पड़ेगी, क्योंकि वह पाकिस्तान मूल का मुसलमान है। अपने पत्र में आगे लिखा कि लॉस एजिल्स की जेल में पांच साल की कैद के बाद राणा की सेहत और खराब हो चुकी है। राणा को पार्किंसंस रोग है। उसकी सोचने-समझने की क्षमता भी कम हुई है। इसके अलावा वह बार-बार पेशाब आने और याददाश्त की समस्या से जूझ रहा है। वकील ने कहा कि राणा के मूत्राशय में एक गांठ है। संदेह है कि ये कैंसर हो सकता है।

विदेश मंत्रालय की दो टूक, भारत भेजा जाएगा

वकील जॉन डी क्लाइन ने कहा कि राणा को स्ट्रोक, शुगर, टीबी और दिल का दौरा पड़ने का भी खतरा है। उसे डायलिसिस की भी जरूरत पड़ेगी। वह कैंसर का इलाज करवा रहा है। अगर मूत्राशय के कैंसर का खुलासा होता है तो उसे सर्जरी और कीमोथेरेपी से भी गुजरना पड़ेगा।

वकील की इस लंबी चौड़ी पटकथा को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तत्काल खारिज कर दिया। 11 फरवरी को लिखे जवाबी पत्र में उन्होंने कहा कि तहव्वुर राणा को भारत भेजा जाएगा। यह भी कहा गया कि प्रत्यर्पण में अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया गया है।

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