दून की किताबों की दुकानों में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, बिना ISBN नंबर की बुक्स बेचकर करोड़ों का कारोबार

 

देहरादून। कॉपी-किताब की दुकानों पर प्रशासन की छापेमारी में एक बड़ा फर्जीवाड़ा भी उजागर होता दिख रहा है। प्रशासन की कार्रवाई में न सिर्फ अभिभावकों के साथ की जा रही मनमानी व जीएसटी चोरी पकड़ी गई, बल्कि किताबों की बिक्री में डुप्लीकेसी की आशंका को भी बल मिला है।

क्योंकि, नेशनल बुक हाउस, ब्रदर बुक डिपो व एशियन बुक डिपो में बिना इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर (आइएसबीएन) की किताबों की बिक्री पाई गई है। तीनों बुक डिपो में ऐसी किताबों की संख्या 20 थीं। इनमें या तो आइएसबीएन था ही नहीं या गलत नंबर दर्ज किया गया था।

ये किताबें विद्यालयी शिक्षा की लगभग सभी कक्षाओं से संबंधित हैं। इसका सीधा अर्थ है कि दून में डुप्लीकेट या चहेते प्रकाशकों की किताबें मनमाने दाम पर बेचकर करोड़ों रुपये का कारोबार किया जा रहा है।

क्या होता है ISBN?

आइएसबीएन एक बार कोड की भांति किताबों पर लिखा होता है। इस नंबर से उस किताब के लेखक, पुस्तक के मूल नाम, मूल्य, प्रकाशक का नाम और पृष्ठों की संख्या तक की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वर्ष 2007 तक यह 10 अंकों का होता था, जबकि अब इसकी संख्या 13 होती है।

स्कूल के नाम की कॉपी भी बेची जा रही

क्रास रोड स्थित एशियन बुक डिपो में दून कैंब्रिज स्कूल व सनराइज एकेडमी के नाम की कॉपी (नोटबुक) की बिक्री भी पाई गई। इससे यह अंदेशा भी है कि स्कूल कॉपी की खरीद के लिए किसी बुक डिपो को अधिकृत कर अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं।

बिना आइएसबीएन या फर्जी नंबर की पकड़ी गई किताबें

बुक स्टोर पुस्तकें

नेशनल बुक हाउस (डिस्पेंसरी रोड)

जूलियस सीजर गाइड

साहित्य सागर

हिंदी व्याकरण गरिमा

एकांकी संचय

जूलियस सीजर बुक

ट्रेजर चेस्ट (कक्षा नौ व दस)

ट्रेजर चेस्ट नोट (कक्षा नौ)

ट्रेजर चेस्ट नोट (कक्षा दस)

अल्ट्रा ब्राइट लर्निंग

माय कलरिंग

एशियन बुक डिपो (क्रास रोड)

साहित्य सागर अभ्यास

केमेस्ट्री लैब मैनुअल

वसुधा

जावा मेड सिंपल

ब्रदर बुक डिपो (सुभाष रोड)

एकांकी संचय

ट्रेजर चेस्ट (कक्षा नौ व दस)

जूलियस सीजर वर्क बुक

आइडीज (फ्रेंच भाषा की पुस्तक)

आनंदम संस्कृत पाठ्य पुस्तक

प्रवाह

डिफ्रेंट्स स्ट्रोक्स

द एसेंस आफ लाइफ मोरल वैल्यू

अब तक सभी सिर्फ आंखें दिखाते रहे

नए शिक्षा सत्र के साथ ही कॉपी-किताबों की बिक्री व अभिभावकों के साथ मनमानी का खेल शुरू हो जाता है। इसके विरोध में विभिन्न सामाजिक संगठन सड़कों पर लामबंद भी होते हैं। इस सबके बीच शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन की मशीनरी हरकत में आ जाती है।

स्कूलों और बुक डिपो संचालकों को कड़े निर्देश जारी किए जाते हैं। कार्रवाई का भय भी दिखाया जाता है। हालांकि, यह सब सिर्फ आंखें दिखाने वाला साबित होता रहा।

इस बार भी बुक डिपो संचालक और इस गठजोड़ में शामिल स्कूल प्रबंधन प्रशासन की चेतावनी को पूर्व की भांति रस्मअदायगी के रूप में देख रहे थे। लेकिन, जिलाधिकारी सविन बंसल इससे आगे बढ़े और न सिर्फ छापेमारी करवाई, बल्कि अनियमितताएं मिलने पर एफआइआर भी दर्ज करवा दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में की गई इस कार्रवाई से शहर के दूसरे बुक डिपो संचालक भी सकते में हैं। इनसे जुड़े स्कूल प्रशासन को डर सता रहा है कि कार्रवाई की आंच उन तक भी पहुंच सकती है।

 

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