Parking in Dehradun : देहरादून जैसे शहर में बढ़ते पार्किंग संकट ने उड़ाई MDDA की नींद, हर रोज बढ़ रही परेशानी

देहरादून: जिस दून शहर का पहला मास्टर प्लान वर्ष 1982-83 में बन गया था, उसे कभी भी मास्टर ढंग से लागू नहीं होने दिया गया। एक तरफ मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) मास्टर प्लान के अनुरूप निर्माण कराने के दावे करता रहा और दूसरी तरफ सफेदपोशों की शह और अधिकारियों की अनदेखी से मनमर्जी के निर्माण होते चले गए।

आज स्थिति यह है की रिहायशी क्षेत्र 70 प्रतिशत को पार कर गया है और इस आबादी की जरूरत की पूर्ति के लिए कामर्शियल निर्माण के मानक भी सिर्फ आर्किटेक्ट के नक्शे में पूरे होते रहे। जिसका नतीजा यह है की सड़कों पर पार्किंग का संकट विकराल रूप ले चुका है। पार्किंग के गहराते संकट के बीच एक बार फिर एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने हालात पर काबू पाने के नए प्रयास शुरू किए हैं। उन्होंने सभी अभियंताओं को निर्देश दिए हैं कि वह अपने संपर्कों का प्रयोग कर इस दिशा में कदम उठाएं।

शनिवार को एमडीडीए सभागार में आयोजित बैठक में उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि सभी अभियंता ऐसे व्यक्तियों की पहचान करें, जो जनहित में पार्किंग, शौचालय, पार्क के लिए स्थान उपलब्ध करा सकें। ऐसी भूमि को एमडीडीए खरीद लेगा। इसी दिशा में उन्होंने आर्किटेक्ट से भी शहर के हित में सुझाव मांगे हैं। तभी जाकर आबादी के दबाव में घुटते शहर को उसकी खोई हुई अहमियत और खुलापन लौटाया जा सकता है।

 

25 लाख की प्रस्तावित आबादी के लिए क्या होगी व्यवस्था

पुराना मास्टर प्लान वर्ष 2005 से लागू माना जाता है, लेकिन इसे वर्ष 2008 से लागू किया जा सका। तब दून में आवासीय क्षेत्र 40 प्रतिशत तक फैला था। हालांकि, मास्टर प्लान के वृहद रूप जोन प्लान को संशोधन के साथ वर्ष 2008 में लागू किया जा सका। तब तक मास्टर प्लान के प्रविधान और धरातलीय स्थिति बेमेल हो चुकी थी।

क्योंकि, तब तक आवासीय क्षेत्र सीमा से बाहर निकलकर 70 प्रतिशत को पार कर गया था। अब तो किसी भी तरह की प्लानिंग में बस बेबसी ही नजर आती है। क्योंकि, अब वर्ष 2041 तक के प्रस्तावित जीआइएस आधारित मास्टर प्लान में आबादी का आंकड़ा 25 लाख माना गया है। वर्तमान में 13 लाख के करीब आबादी में ही जब यह हाल हैं तो भविष्य की आबादी के हिसाब से हालात और विकट हो सकते हैं।

 

पांच करोड़ तक के कार्य पीएम गतिशीलता पोर्टल पर कराएं रजिस्टर

उपाध्यक्ष तिवारी ने पांच करोड़ रुपये तक के कार्यों को अनिवार्य रूप में पीएम गतिशीलता पोर्टल पर रजिस्टर कराने को कहा। साथ ही आढ़त बाजार शिफ्टिंग परियोजना में तेजी लाने को भी कहा।

 

 

 

 

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