Dehradun News: इस तरह तो 2025 में भी नहीं हट पाएगा 8.5 लाख टन कूड़ा का पहाड़, स्वच्छता रैंकिंग में बड़ी बाधा

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दून नगर निगम के सिर पर करीब साढ़े आठ लाख टन कूड़े के पहाड़ का बोझ है। नगर निगम कूड़ा निस्तारण करने का दावा कर रहा है। सहस्त्रधारा के 4.18 लाख टन कूड़े के निस्तारण का काम शुरू भी हो चुका है। लेकिन शीशमबाड़ा में जमा करीब 4.5 लाख टन कूड़ा के निस्तारण शुरू नहीं हो सका है।

दोनों प्लांट मिलकर भी यदि रोजाना दो हजार टन कूड़े का निस्तारण करें तब भी डेढ़ साल से पहले निस्तारण संभव नहीं है। इससे साफ है कि इस बार फिर स्वच्छता रैंकिंग 2025 में यह कूड़ा फर्क डालेगा। शीशमबाड़ा कूड़ा प्लांट में रैमकी कंपनी का छोड़ा करीब 4.5 लाख टन कूड़े का पहाड़ जमा है। इससे पहले निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड सहस्त्रधारा रोड पर करीब 4.18 लाख टन कूड़ा जमा है

दोनों जगहों के करीब 8.5 लाख टन कूड़े का निस्तारण नगर निगम के लिए परेशानी का सबब रहा है। अब सहस्त्रधारा के कूड़ा निस्तारण के लिए निगम करीब 20 करोड़ रुपये और शीशमबाड़ा के कूड़े के निस्तारण के लिए 24 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। सहस्त्रधारा के कूड़ा निस्तारण का काम भी शुरू हो गया है। जबकि शीशमबाड़ा स्थित कूड़े के निस्तारण का कार्य अभी पाइपलाइन में हैं।

कूड़ा निस्तारण में लग जाएंगे डेढ़ साल

निगम के अधिकारियों के अनुसार सहस्त्रधारा में 1000 टन कूड़ा निस्तारित करने का दावा किया जा रहा है। यदि रोजाना प्लांट चलेगा तब जाकर इस कूड़े का निस्तारण करीब डेढ़ साल में होगा। इसी तरह शीशमबाड़ा में भी यदि 1000 टन कूड़ा निस्तारण का प्लांट लगाया तो तब जाकर वहां भी कूड़ा निस्तारण में डेढ़ साल लग जाएंगे। यह भी तब संभव है जब दोनों प्लांट लगातार चलें। उधर बीच में मशीनों का मेंटेनेंस है और बरसात सहित अन्य कई कारण होते हैं जिसकी वजह से प्लांट बीच में बंद रहता है। इससे साफ है कि 2025 में भी इस कूड़े का निस्तारण करना संभव नजर नहीं आ रहा

कूड़े का पहाड़ हर बार दून की स्वच्छता रैंकिंग कर रहा खराब

शीशमबाड़ा और सहस्त्रधारा के कूड़े के पहाड़ न सिर्फ शहर के लोगों के लिए नासूर बने हुए है, बल्कि शहर की स्वच्छता पर भी यह धब्बा हैं। देहरादून में जब कूड़ा प्लांट नहीं था तब सहस्त्रधारा रोड पर कूड़ा डाला जाता था। शीशमबाड़ा प्लांट बनने के बाद रैमकी कंपनी ने वहां 4.5 लाख टन कूड़े का पहाड़ बना दिया। जिसका आज तक निस्तारण नहीं हो सका। हर बार स्वच्छता रैंकिंग में इसका असर देखने को मिलता है। स्वच्छता रैंकिंग जब भी होती है, हर बार यह कूड़ा यहां स्वच्छता रैंकिंग पर प्रभाव डालता है।

 

 

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