राहुल गांधी ने रायबरेली से किया नामांकन, सोनिया-खड़गे समेत ये नेता रहे मौजूद।

Rahul Gandhi Files Nomination From Raebareli: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रायबरेली की अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के कुछ घंटों बाद शुक्रवार को अपना नामांकन दाखिल किया। पार्टी नेता के साथ उनकी बहन और कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और रायबरेली की मौजूदा सांसद सोनिया गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे।

 

पहले ऐसा माना जा रहा था कि प्रियंका गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं जिसे सोनिया ने छोड़ दिया है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व के आग्रह के बावजूद प्रियंका चुनाव मैदान में नहीं उतरना चाहती थीं। इस बीच हाल ही में प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा ने खुद ही अमेठी से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। राहुल गांधी इस अमेठी सीट से तीन बार 2004, 2009, 2014 में जीते। हालांकि, 2019 में राहुल अमेठी से हार गए। इस सीट से बीजेपी की स्मृति ईरानी ने जीत हासिल की। हालांकि, राहुल केरल के वायनाड से भी चुनाव में खड़े हुए थे। वहां से जीतकर वे लोकसभा में पहुंचे। इस बार भी राहुल गांधी वानाड से चुनाव लड़ रहे हैं। वह पहले ही वहां अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं। इसके अलावा राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

 

कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन

इस बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। अखिलेश की पार्टी ने अमेठी सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अखिलेश चाहते थे कि राहुल अमेठी से चुनाव लड़ें। लेकिन राहुल नहीं माने। हालांकि, राहुल अपनी मां की रायबरेली सीट से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गए हैं।

 

रायबरेली लोकसभा सीट

1952 में फिरोज गांधी ने पहली बार रायबरेली से चुनाव लड़ा। इंदिरा गांधी ने यह सुनिश्चित किया कि परिवार की विरासत 1967 से 1977 तक कायम रहे। 1980 में इंदिरा गांधी ने रायबरेली और मेडक में जीत हासिल की। लेकिन उन्होंने मेडक सीट चुनी और रायबरेली से इस्तीफा दे दिया। जब सोनिया गांधी रायबरेली आईं तो उन्हें इंदिरा गांधी की पसंदीदा ‘बहू’ के रूप में देखा गया। पांच बार सांसद रहने के बाद जब सोनिया गांधी ने रायबरेली छोड़ने का फैसला किया, तो उन्होंने मतदाताओं को एक खुला पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा कि स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के कारण मैं अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी। इस फैसले के बाद मुझे सीधे तौर पर आपकी सेवा करने का मौका तो नहीं मिलेगा, लेकिन निश्चित रूप से मेरा दिल और आत्मा हमेशा आपके साथ रहेंगे।

 

 

 

 

 

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