दून अस्पताल के गेट पर अव्यवस्थाओं की मार… इलाज के लिए मरीज हो रहे लाचार – Rajdhani Ki Hunkar

दून अस्पताल के गेट पर अव्यवस्थाओं की मार… इलाज के लिए मरीज हो रहे लाचार

 

देहरादून । दून अस्पताल के गेट पर अव्यवस्थाएं हावी हैं। ऐसे में इलाज कराने आने वाले मरीजों और तीमारदारों को हर रोज परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गेट में प्रवेश करने से पहले ही जाम की मुसीबत झेलनी पड़ रही है।

उधर, नगर निगम और यातायात पुलिस व प्रशासन मामले से आंखें बंद किए हुए हैं। यह हालात तब है जब अधिकांश जिम्मेदार विभाग व अधिकारियों के कार्यालय अस्पताल परिसर के आस-पास स्थित है।

दून कालेज अस्पताल की न्यू ओपीडी भवन के गेट पर अतिक्रमण और जाम से मरीजों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। दून अस्पताल में दो से ढाई हजार मरीज प्रतिदिन ओपीडी में इलाज कराने आते हैं। वहीं, बड़ी संख्या में मरीजों के साथ तीमारदार भी रहते हैं।

शहर के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की संख्या भी काफी होती है। लेकिन, ओपीडी भवन के गेट पर जाम में फंसते ही मरीजों का दर्द और बढ़ जाती है। सड़क पर जाम लगने से मरीजों को ओपीडी तक पहुंचने में ही पसीने छुट जाते हैं।

अवैध पार्किंग और ठेली-रेहड़ियों का सड़क पर कब्जा

दून अस्पताल चौक शहर के व्यस्तम स्थानों में से एक हैं। यहां से परेड ग्राउंड, तहसील चौक, कचहरी रोड, घंटाघर के लिए रास्ता जाता है। प्रतिदिन हजार वाहन यहां से गुजरते हैं। ऐसे में हर समय वाहनों की भीड़ रहती है। वहीं, दून अस्पताल चौक के पास न्यू ओपीडी भवन के गेट की साइड अवैध आटो स्टैंड संचालित है। दो पहिया वाहन का भी यहां पर जमावड़ा लगा रहता है।

अवैध स्टैंड के सामने सड़क पर रेहड़ी-ठेलियों पर फल बेचने वालों का कब्जा है। गेट के दायें ओर अस्पताल साइड में स्टाफ कर्मियों के वाहन पूरे दिन सड़क पर खड़े रहते हैं। जबकि, दूसरी ओर गेट से लेकर पंडित दीन दयाल पार्क तक दोपहिया और फोर व्हीलर वाहनों की पार्किंग नगर निगम संचालित कर रहा है।

ऐसे में सड़क का अधिकांश हिस्सा पार्किंग और अवैध स्टैंड-पार्किंग, रेहड़ी-ठेली वालों के कब्जे में है। वाहनों के दबाव के कारण थोड़ी-थोड़ी देर में सड़क पर जाम लगता रहता है। इससे फोर व्हीलर से आने वाले मरीज ओपीडी परिसर में दाखिल होन से पहले ही जाम में फंस रहे हैं।

जिम्मेदार फेर रहे मुंह

ओपीडी गेट पर जाम के समस्या नई नहीं हैं। लंबे समय से मरीजों को इसका सामना करना पड़ रहा है। वहीं, नगर निगम, सीपीओ, यातायात पुलिस और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की गाड़ियों यहां से दिनभर गुजरती रहती है। लेकिन, ये जिम्मेदार अधिकारी निगाहें फेर कर यहां से निकल जाते हैं। ऐसे में समस्या और विकराल होती जा रही है।

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