देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डा गीता खन्ना की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों से जुड़े कई गंभीर मामलों की सुनवाई की गई। जिसमें प्रमुख रूप से कान्वेंट आफ जीजस एंड मैरी (सीजेएम) एंड मैरी में छात्रा की ड्रेस पर टिप्पणी करने और लूसेंट स्कूल न बिना पंजीकरण छात्रों के दाखिले पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया
आयोग ने स्पष्ट किया कि बाल अधिकारों, शिक्षा की निरंतरता और संस्थानों की वैधानिकता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीजेएम में छात्रा की ड्रेस पर टिप्पणी करने पर भी शिक्षक पर कार्रवाई नहीं
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने कान्वेंट आफ जीसस एंड मैरी की एक छात्रा की अस्मिता से जुड़ी शिकायत पर सुनवाई की। जिसके अनुसार एक शिक्षक ने छात्रा की ड्रेस पर भद्दी टिप्पणी की थी। छात्रा ने जब प्रधानाचार्य से शिकायत की तो उन्होंने शिक्षक पर कार्रवाई कर्ण की जगह प्रकरण को रफा दफा कर दिया। जिससे छात्रा अवसाद में आ गई।
आयोग ने स्कूल को नोटिस भेजकर पक्ष रखने को कहा था, लेकिन स्कूल प्रशासन की तरफ से कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसे गंभीर मानते हुए आयोग ने अब 17 जनवरी को बीईओ कार्यालय से संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अध्यक्ष खन्ना ने कहा कि चूंकि बालिका की कक्षा 12वीं की परीक्षा निकट है, इसलिए उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो, लिहाजा उसे वीडियो कालिंग के माध्यम से सुनवाई से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
बिना पंजीकरण छात्रों के दाखिले पर लूसेंट विद्यालय की एनओसी निरस्त
लूसेंट विद्यालय का मामला भी आयोग के समक्ष आया, जहां पूर्व वर्षों में बिना पंजीकरण छात्रों को विद्यालय में रखा गया था। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से कुछ छात्रों को परीक्षा की अनुमति मिली थी, लेकिन इसके बाद भी विद्यालय ने शिक्षा विभाग के नोटिसों का कोई जवाब नहीं दिया और न ही प्रबंधन समिति सुनवाई में उपस्थित दर्ज कराई।