युवती की पीठ पर लगी आग, दो भाइयों के साहस व सूझबूझ से बची जान; पूरी घटना CCTV कैमरे में हुई रिकार्ड

देहरादून: दो साहसी भाई। एक की उम्र करीब महज 15 और दूसरे की महज 11 साल। लेकिन, दोनों भाइयों ने जिस साहस का परिचय दिया है, वह बेहद काबिले-तारीफ है। इन दोनों ने न सिर्फ बुरी तरह आग की चपेट में आई एक किशोरी की जान बचाई, बल्कि आग बुझाते समय खुद की जान की परवाह भी नहीं की।

ये साहसी भाई हैं मोहिनी रोड निवासी प्रणवत और दिवजोत। प्रणवत 10वीं कक्षा, जबकि दिवजोत कक्षा छह के ब्राइटलैंड्स स्कूल के छात्र हैं। आग की चपेट में आई युवती और फिर उसकी मदद को आगे आए बच्चों के साहस का पूरा घटनाक्रम एक घर के सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 10 बजे दोनों भाई पढ़ाई से ब्रेक लेकर घर के बाहर बैडमिंटन खेलने निकले थे। तभी सड़क के कोने की दुकान के पास उन्हें किसी लड़की के चीखने की आवाज सुनी। दोनों भाई तत्काल वहां पहुंचे तो उनके रोंगटे खड़े हो गए।

देखा कि एक युवती की पीठ से आग की लपटें उठ रही थीं। वह बुरी तरह आग की चपेट में थी। पहले तो दोनों भाइयों को कुछ नहीं सुझा। फिर छोटा भाई घर के गार्डन में रखी पानी की बाल्टी लेने दौड़ा, तो बड़े भाई की नजर सड़क पर गिरी लड़की की अधजली जैकेट पर पड़ी। शायद युवती ने आग लगते ही जैकेट उतार फेंकी थी, लेकिन तब तक आग भीतर पहनी स्वेटर को पकड़ चुकी थी।

प्रणवत ने तत्काल जैकेट उठाई और अपनी परवाह किए बिना उससे आग बुझानी शुरू कर दी। आग लगभग बुझ चुकी थी और छोटा भाई पानी की बाल्टी भी ले आया था। साहस और मदद के इस जज्बे में पास के घर रहने वाला एक अन्य बच्चा विवान भी शामिल हुआ। वह घर से पानी की बोतल ले आया था। फिर क्या था सभी ने मिलकर लड़की की पीठ पर लगी आग बुझाकर उसकी जान बचा ली।

शोरगुल सुनकर प्रणवत और दिवजोत के पिता कुलदीप सिंह भी बाहर आ गए। कुलदीप रायवाला में आर्मी सेंटर आफ एक्सीलेंस में डिप्टी कमांडेंट हैं। उन्होंने तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम में काल कर घटना की जानकारी दी। थोड़ी देर में ही पुलिस पहुंची और उपचार के लिए युवती को कोरोनेशन अस्पताल पहुंचाया।

युवती का अभी उपचार चल रहा है। वह 15 से 20 प्रतिशत तक जली है। हालांकि, वह खतरे से बाहर है। चिकित्सकों के मुताबिक युवती का नाम इंदु है और उसकी उम्र करीब 25 वर्ष है। इंदु शिमला बाईपास रोड की रहने वाली बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, दुकान के बाहर एक दीपक रखा था। शायद उससे वह आग की चपेट में आ गई

वह शिमला बाईपास रोड से मोहिनी रोड कैसे पहुंची, पुलिस इस बात की जांच कर रही है। प्रणवत और दिवजोत के मामा नवनीत भुल्लर हैं, जो वर्तमान में एसएसपी एसटीएफ पद पर कार्यरत हैं। नवनीत भुल्लर ने अपने भांजों के साहस की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि समाज में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहना बड़ी बात है। यह घटना दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

 

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