मंगलवार को आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा था। लोकसभा चुनाव के लिए ‘नेताजी’ का नामांकन शहरवासियों पर आफत बनकर गुजरा।
चुनाव आयोग की गाइड-लाइन को दरकिनार कर गाजे-बाजे और समर्थकों की भीड़ के साथ सड़क पर शक्ति-प्रदर्शन करने उतरे प्रत्याशियों की वजह से न केवल जहां से जुलूस गुजरा, वहीं पर यातायात जाम लगता चला गया, बल्कि शहर में यातायात का पहिया थम गया। हालात यह हुए कि दिन में 11 बजे से शहर में जाम लगना शुरू हो गया था और दोपहर होते-होते शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई।
कोई यातायात प्लान नहीं बनाया
यह पूर्व विदित था कि मंगलवार को टिहरी संसदीय सीट के लिए भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी जुलूस के रूप में समर्थकों के साथ शक्ति-प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर तक नामांकन के लिए जाएंगे। इसके बावजूद दून पुलिस ने शहरवासियों को जाम से बचाने और यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए कोई यातायात प्लान नहीं बनाया। नेताओं व उनके समर्थकों की भीड़ सड़कों पर क्या उतरी, यातायात जाम होता चला गया।
परेड ग्राउंड से भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह का जुलूस निकला, जबकि राजपुर रोड पर कांग्रेस भवन से कांग्रेस प्रत्याशी जोत सिंह गुनसोला का। दोनों ही जुलूस में बड़े नेताओं की उपस्थिति रही। भाजपा प्रत्याशी के जुलूस में तो स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल रहे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी के जुलूस में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा व अन्य प्रांतीय नेता।
माला राज्य लक्ष्मी का जुलूस परेड ग्राउंड से दर्शनलाल चौक से घंटाघर, पलटन बाजार, राजा रोड होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा, वहीं गुनसोला का जुलूस एस्लेहाल तिराहा से घंटाघर, दर्शनलाल चौक, दून मेडिकल कालेज होते हुए कलेक्ट्रेट तक गया। मुख्य मार्ग पर एक ओर भाजपा और दूसरी ओर कांग्रेस का जुलूस होने से राजपुर रोड, घंटाघर, चकराता रोड, गांधी रोड तक यातायात जाम हो गया।
इन मार्गों से जुड़े अन्य व संपर्क मार्गों पर भी वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ने से वाहन जहां के तहां फंसे रह गए। दोपहर में सहारनपुर रोड से लेकर आढ़त बाजार, प्रिंस चौक और गांधी रोड पर एक घंटे से ज्यादा जाम लगा रहा व दोपहर एक बजे लगभग पूरा शहर जाम की चपेट में फंसा दिखा। वहीं, जाम के दौरान यातायात पुलिस कर्मी भी बेबस नजर आए।
स्कूलों की छुट्टी के समय स्थिति बिगड़ी
स्कूलों की छुट्टी के समय हालात और बेकाबू हो गए। स्कूली बच्चों को लेने आए अभिभावकों के वाहन और स्कूली वाहन जाम में फंस गए। जो बच्चे स्कूली वाहनों से घर जाते हैं, उन्हें लेने को परिजन एक से डेढ़ घंटे इंतजार करते रहे। कुछ अभिभावकों ने देरी का कारण जानने को स्कूल वाहनों के चालक-परिचालक को फोन किया, जबकि कुछ अभिभावक तो अपने वाहन लेकर ही जाम में फंसे बच्चों को लेने निकल पड़े।
सड़क किनारे वाहन, आफत
पुलिस का दावा था कि सड़क किनारे वाहन खड़े होने नहीं दिए जाएंगे, लेकिन मंगलवार को कलक्ट्रेट समेत शहर की सभी मुख्य सड़कों पर वाहन खड़े नजर आए।