भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत और थकान मिटाने का सबसे लोकप्रिय तरीका है. सड़क किनारे चाय की दुकानें हों या ऑफिस कैंटीन, हर जगह लोग चाय का आनंद लेते दिखाई देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चाय को आप स्वाद और आदत के लिए पी रहे हैं, वही आपके स्वास्थ्य को धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है? डॉक्टरों का कहना है कि जब गर्म चाय प्लास्टिक के गिलास या पॉलिथिन थैली में डाली जाती है, तो उसमें मौजूद हानिकारक रसायन (केमिकल्स) चाय में घुल जाते हैं.
प्लास्टिक के विषैले पदार्थ कोशिकाओं पहुंचाते हैं नुकसान
शोध बताते हैं कि प्लास्टिक से निकले ये विषैले पदार्थ शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं. लंबे समय तक इनका सेवन कैंसर, हार्मोनल असंतुलन, प्रजनन संबंधी समस्याएं और पाचन तंत्र की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
प्लास्टिक में होते हैं कैंसर वाले कैमिकल
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित बीडी पाण्डे जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्ताल बताते हैं कि चाय आमतौर पर 70 से 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर परोसी जाती है. इतना तापमान प्लास्टिक की सतह को कमजोर कर देता है, जिससे उसमें मौजूद बिस्फेनॉल-ए (BPA) और फ्थैलेट्स जैसे हानिकारक केमिकल निकलने लगते हैं. यही केमिकल धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की आशंका बढ़ाते हैं, यानी जो चाय आपको स्वादिष्ट और ताजगी देने वाली लगती है, वही समय के साथ आपके लिए जहर साबित हो सकती है.
डॉक्टरों की सख्त चेतावनी
डॉ. दुग्ताल का कहना है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से प्लास्टिक, डिस्पोजल या थैली में परोसी गई चाय पूरी तरह असुरक्षित है. इसके बजाय मिट्टी, स्टील, पीतल या कांच के बर्तनों में बनी चाय पीना अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक है. इन बर्तनों में चाय न केवल सुरक्षित रहती है, बल्कि स्वाद भी बेहतर होता है. सुविधा के लिए अपनाई गई लापरवाही सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.