आम आदमी की जेब पर कम हुआ इलाज का बोझ, एमआरआइ, सीटी स्कैन, एक्सरे सहित कई पैथोलाजी टेस्‍ट हुए सस्‍ते

 

देहरादून। Doon Medical College: दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में इलाज पर होने वाले खर्च का बोझ कम हो गया है। राज्य सरकार ने राजकीय मेडिकल कालेजों में एक समान शुल्क की व्यवस्था लागू की है। जिसके तहत रेडियोलाजी व पैथोलाजी जांच के लिए सीजीएचएस की दरें लागू की गई हैं।

इससे एमआरआइ, सीटी स्कैन, एक्सरे सहित विभिन्न पैथोलाजी जांच का शुल्क घट गया है। जबकि सीबीसी, टीएमटी, अल्ट्रासाउंड आदि महंगे हुए हैं।

अभी तक लिया जा रहा था अलग-अलग शुल्क

दरअसल, राजकीय मेडिकल कालेजों में विभिन्न सेवाओं का अभी तक अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा था। पंजीकरण शुल्क से लेकर तमाम जांच की दरें भिन्न थी। इस असमानता को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने समान शुल्क की व्यवस्था लागू की है। इसी क्रम में एमआरआइ, एक्सरे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड व खून की तमाम जांच अब सीजीएचएस की दर पर होगी।

सीजीएचएस दर लागू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है। उन पर पड़ने वाला जांच का खर्च कम हो गया है। चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस बिष्ट ने बताया कि एमआरआइ, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व ईसीजी की नयी दरें लागू कर दी गई हैं। जबकि सीटी स्कैन, पैथोलाजी जांच की दरें भी साफ्टवेयर पर फीड की जा रही हैं।

बता दें कि राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में न केवल शहर बल्कि पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्र और यूपी-हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां हर दिन दो से ढाई हजार के बीच ओपीडी रहती है। इन मरीजों को नयी दरें लागू होने से बड़ी राहत मिलेगी।

लिस्ट लंबी, लग रहा वक्त

सीजीएचएस की रेट लिस्ट में जांच की दरें बाडी पार्ट के लिहाज से वर्गीकृत हैं। जबकि पहले ऐसा नही था। मसलन शरीर के किसी भी एक हिस्से का एमआरआइ पहले 3500 रुपये में होता था। जबकि सीजीएचएस में सिर, गर्दन, कंधा आदि के अलग-अलग रेट हैं। रेट लिस्ट काफी विस्तृत होने से इन्हें साफ्टवेयर पर अपलोड करने में वक्त लग रहा है। पंजीकरण प्रभारी विनोद नैनवाल व उनकी टीम लगातार इस काम में लगी है।

नेक्स्टजेन पर भी दोबारा अपलोड करनी होगी दरें

दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में ई-हास्पिटल (हास्पिटल मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम) का नया वर्जन नेक्स्टजेन ई-हास्पिटल शुरू किया जाना है। जिसकी अस्पताल स्तर पर तैयारी चल रही है। इसी क्रम में तमाम जांच दरें भी नए साफ्टवेयर पर अपलोड की गई। पर अब जांच दर परिवर्तित होने से इन्हें नए सिरे से साफ्टवेयर पर अपलोड करना होगा। जिस कारण नेक्स्ट जेन ई-हास्पिटल को लागू करने में भी वक्त लगेगा।

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