देहरादून। Dehradun New Mayor: उत्तराखंड के सबसे बडे नगर निगम देहरादून के नवनिर्वाचित महापौर सौरभ थपलियाल सहित सभी 100 पार्षदगणों ने शुक्रवार को अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली।
नगर निगम देहरादून के प्रांगण में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रशासक/आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने नव निर्वाचित मेयर को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद मेयर ने सभी नव निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, विधायक धर्मपुर विनोद चमोली, विधायक कैन्ट सविता कपूर, राजपुर खजानदास, रायपुर उमेश शर्मा काऊ, डोईवाला बृजभूषण गैरोला, पुरोला दुर्गेश्वर लाल, पूर्व केबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, पूर्व महापौर सुनील उनियाल गामा, जिलाधिकारी सविन बंसल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य नगर आयुक्त नगर निगम नमामि बसंल, नगर मजिस्टेट प्रत्युष सिंह, उप नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल सहित अन्य पदाधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बडी संख्या में जनता मौजूद थी।
देहरादून में 20वां बोर्ड गठित
वर्ष 1919 से दून निकाय में 15 बार पालिका परिषद का गठन हुआ। जिसके बाद यह नगर निगम बन गया था और यहां चार बार बोर्ड का कार्यकाल पूरा हुआ। अब देहरादून में 20वें बोर्ड का गठन हो गया है। साथ ही सौरभ थपलियाल नगर निगम के 20वें महापौर/अध्यक्ष के रूप में कमान संभाल चुके हैं।
भजपा पार्षदों की फौज देगी महापौर का साथ
महापौर सौरभ थपलियाल के रिकार्ड अंतर से जीत के साथ ही 100 वार्डों में 64 पार्षद भाजपा भाजपा के हैं। जिससे स्पष्ट है कि देहरादून नगर निगम में भाजपा बेहद मजबूत स्थिति में है। भाजपा की पिछली बार की तुलना में चार सीट बढ़ी हैं तो निर्दलियों की संख्या भी छह से 13 पर पहुंच गई है।
वहीं, कांग्रेस के पार्षदों की संख्या 34 से घटकर 23 पहुंच गई है। देहरादून नगर निगम के 100 वार्डों में से मजबूत बोर्ड के लिए कम से कम 51 वार्ड एक पार्टी के खाते में जाने चाहिए। महापौर सौरभ थपलियाल की राह भी आसान रहेगी और बोर्ड में प्रस्ताव पारित करने के लिए पार्षदों का मान-मनौव्वल नहीं करना होगा। हालांकि, कांग्रेसियों की घटती संख्या को देखते हुए नगर निगम में मजबूत विपक्ष नजर नहीं आ रहा है।
बढ़ाने होंगे आय के स्रोत, बजट की न रहे किल्लत
क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से प्रदेश का सबसे बड़ा देहरादून नगर निगम आर्थिक मामले में अभी तक आत्मनिर्भर नहीं हो सका है। अपनी आय के साथ ही निगम शासन की ओर अनुदान के लिए टकटकी लगाए बैठा रहता है।
निगम भले ही भवन कर वसूली साल दर साल बढ़ा रहा हो, लेकिन अभी तक यह 70 करोड़ रुपये के पार नहीं पहुंच सका है। जबकि, कूड़ा उठान शुल्क के नाम पर भी नगर निगम सालाना 15 करोड़ रुपये भी प्राप्त नहीं कर पा रहा है।
इसके अलावा नगर निगम के कार्मिकों के वेतन पर ही 100 करोड़ रुपये के करीब खर्च आता है। ऐसे में विकास कार्यों से लेकर अन्य योजनाओं के लिए नगर निगम को बगलें झांकनी पड़ती हैं। शासन की ओर निगम को मिलने वाली करीब डेढ़ सौ करोड़ के बजट से प्रमुख कार्य किए जाते हैं।