अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल पर कसा तंज, ममता बनर्जी को अपनी तुलना केजरीवाल व सोरेन से नहीं करनी चाहिए

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि भ्रष्टाचार के कई मामलों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेता और मंत्री जेल में हैं. राज्य में केंद्रीय एजेंसियां ​​अक्सर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों, सांसदों या करीबी रिश्तेदारों के घरों की तलाशी लेती रहती हैं.

 

WB News : पश्चिम बंगाल के कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Choudhary) तृणमूल पल कटाक्ष करते हुए कहा कि ममता बनर्जी को अपनी तुलना अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन से नहीं करनी चाहिए.पश्चिम बंगाल में बहुत घोटाले हुए हैं और उनकी जांच कोर्ट की निगरानी में हो रही है. केजरीवाल और हेमंत के खिलाफ क्या हुआ और ममता बनर्जी और उनके खोखा बाबू(भतीजे) अभिषेक बनर्जी के खिलाफ क्या हुआ. कोर्ट की निगरानी में सारे घोटाले की जांच हो रही है. जल्द ही मामला सबके सामने आ जाएगा.

 

भ्रष्टाचार के कई मामलों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेता और मंत्री जेल में

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि भ्रष्टाचार के कई मामलों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेता और मंत्री जेल में हैं. राज्य में केंद्रीय एजेंसियां ​​अक्सर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों, सांसदों या करीबी रिश्तेदारों के घरों की तलाशी लेती रहती हैं. कुल मिलाकर राज्य सरकार चुनाव से पहले केंद्र के दबाव से तंग आ चुकी है. दिल्ली, झारखंड समेत देश के विपक्ष शासित राज्यों में भी यही स्थिति है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन पर दबाव बनाने का विरोध किया.

 

तृणमूल प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में किया धरना प्रदर्शन

टीएमसी के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की और मांग की है कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण और आयकर विभाग के प्रमुखों को बदला जाए क्योंकि वे कथित रूप से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं. टीएमसी नेताओं ने बाद में घोषणा की कि वे निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर 24 घंटे के धरने पर बैठ रहे हैं. प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन, मोहम्मद नदीमुल हक, डोला सेन, साकेत गोखले, सागरिका घोष, विधायक विवेक गुप्ता, पूर्व सांसद अर्पिता घोष, शांतनु सेन और अबीर रंजन विश्वास और टीएमसी की पश्चिम बंगाल छात्र इकाई के उपाध्यक्ष सुदीप राहा शामिल थे. नेताओं को बाद में दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया और वहां से बलपूर्वक हटा दिया.

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