Supreme Court: कांवड़ मार्ग पर नेम प्लेट मामले में यूपी सरकार ने रखा पक्ष, धामी सरकार ने मांगा वक्त

 

Supreme Court: कांवड़ यात्रा मार्ग पर नेम प्लेट मामले में शुक्रवार को सु्प्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा. योगी सरकार ने बताया कि आखिर उन्होंने यह फैसला किस उद्देश्य से लिया था. इसके साथ ही देश की शीर्ष अदालत में उत्तराखंड सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का वक्त मांगा है. बता दें कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाने-पीने की दुकान वालों को अपने नेम प्लेट लगाने का आदेश तीन राज्यों ने जारी किया था. इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश शामिल थे. इन तीनों राज्यों को सुप्रीम कोर्ट ने बीती सुनवाई में नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था.

कांवड़ नेम प्लेट मामले पर कब होगी अगली सुनवाई

कांवड़ मार्ग नेम प्लेट मामले पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल यूपी सरकार के जवाब के साथ ही उत्तराखंड सरकार की ओर से वक्त मांगे जाने के बाद अब इस मामले में अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी. इससे पहले यूपी सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को सुनवाई हुई.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान सिर्फ उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ही जवाब दाखिल करने की जानकारी सामने आई है. जबकि बाकी दोनों राज्यों उत्तराखंड और मध्य प्रदेश ने जवाब दाखिल नहीं किया है. ऐसे में सुनवाई को आगे टाला गया.

क्या बोला मध्य प्रदेश सरकार का वकील

कोर्ट में जब यूपी की ओर से जवाब दिया गया और उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश वकील ने वक्त मांगा तो कोर्ट ने पूछा कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कौन आया है. इस पर प्रदेश के वकील ने जवाब दिया कि हमें भी वक्त चाहिए. लेकिन हमारे यहां इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है. न ही प्रदेश सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश पारित किया गया है.

वकील ने कहा कि उज्जैन नगरपालिका ने ऐसा कोई भी आदेश पारित नहीं किया है जिसको लेकर चर्चा हो रही है. वहीं राजधानी दिल्ली के वकील ने भी कहा कि कांवड़ मार्गों पर नेम प्लेट लगाने को लेकर हमारी सरकार की ओर से भी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है.

यूपी सरकार ने कोर्ट ने से की ये मांग

वहीं सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने देश की शीर्ष अदालत से एक अहम मांग की. सरकार ने तुरंत कार्रवाई की आग्रह किया. यूपी की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्णय पर एक तरफ रोक लगा दी गई है. ऐसे में इस मामले में जल्द सुनवाई की जानी चाहिए, वरना तब तक तो यात्रा ही पूरी हो जाएगी.

वहीं यूपी सरकार के खिलाफ दाखिल याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले में अपना जवाब देते हुए कहा कि यह आदेश बीते 6 दशक से नहीं आया था, ऐसे में इस बार अगर यात्रा पूरी भी हो गई तो इससे कुछ बिगड़ने वाला नहीं है.

 

 

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