देहरादून। मरीजों को सस्ती और प्रमाणित जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान जन औषधि केंद्रों पर ऐसी दवाएं मिलीं, जिन पर प्रधानमंत्री जन औषधि योजना का अधिकृत लोगो या मुहर तक नहीं थी।
इतना ही नहीं, केंद्रों पर योजना के दायरे से बाहर की दवाओं और अन्य उत्पादों की बिक्री भी पकड़ी गई। मामले को गंभीर मानते हुए चिकित्सा अधीक्षक डा आरएस बिष्ट ने सभी संचालकों को नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब तलब किया है।
पड़ सकता है मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रतिकूल असर
चिकित्सा अधीक्षक की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि बिना अधिकृत लोगो वाली दवाओं का भंडारण और वितरण प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के दिशा-निर्देशों और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों का गंभीर उल्लंघन है। अस्पताल प्रशासन ने माना है कि ऐसी दवाओं की प्रामाणिकता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है
नोटिस में संचालकों से पूछा गया है कि बिना अधिकृत लोगो वाली दवाएं उनके केंद्रों तक किस माध्यम से पहुंचीं, किस एजेंसी से खरीदी गईं और उनके भंडारण एवं बिक्री की अनुमति किस आधार पर दी गई। साथ ही योजना से इतर दवाओं और अन्य उत्पादों की बिक्री का आधार भी स्पष्ट करने को कहा गया है।
ये है खेल
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर योजना की अधिकृत लोगो वाली जेनेरिक दवाएं ही बेची जानी चाहिए। ये दवाएं सरकार तय दरों पर सस्ती कीमत में उपलब्ध कराती है।
उदाहरण के लिए यदि अधिकृत लोगों के साथ कोई दवा 30 रुपये में मिलती है, तो उसी साल्ट और समान मात्रा की बिना लोगो वाली जेनेरिक दवा 150 रुपये या उससे अधिक दाम पर बेची जा सकती है। यानी दवा का असर समान होने के बावजूद मरीज को कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।
इसी वजह से जन औषधि केंद्रों पर अधिकृत लोगो वाली दवाओं की उपलब्धता और बिक्री अनिवार्य मानी जाती है। यदि उनकी जगह बिना लोगो वाली दवाएं बेची जाती हैं, तो मरीजों को सस्ती दवा का लाभ नहीं मिल पाता।