उत्तराखंड में डिजिटल जिहाद का जाल: देहरादून में मजदूरी करता था आतंकी, पाकिस्तान कनेक्शन पर हाई अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड में तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क की परतें खुलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने राज्य में सक्रिय संदिग्ध एजेंटों, उनके डिजिटल नेटवर्क और पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ संदिग्ध एजेंसियों की रडार पर हैं और जल्द बड़े एक्शन की संभावना जताई जा रही है। देहरादून से पिछले दिनों गिरफ्तार संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस विक्रांत कश्यप और हाल ही में सहारनपुर से पकड़े गए चार आरोपितों के तार एक ही नेटवर्क से जुड़ने के संकेत मिलने के बाद जांच और गहरी हो गई है।

संभावित नेटवर्क की पड़ताल

सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क उत्तराखंड समेत कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है। उत्तर प्रदेश एटीएस ने हाल ही में सहारनपुर से चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। जांच में यह सामने आया कि इनका संपर्क पाकिस्तान में बैठे टीटीएच एजेंट शहजाद भट्टी से था। गिरफ्तार आरोपितों में शामिल शाहरूख पूर्व में देहरादून में मजदूरी कर चुका है। अब एसटीएफ उसके संपर्क में रहे लोगों और संभावित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

इसी कड़ी में उत्तराखंड एसटीएफ ने 24 अप्रैल को प्रेमनगर क्षेत्र से विक्रांत कश्यप को गिरफ्तार किया था। जांच में राजफाश हुआ कि वह भी शहजाद भट्टी के संपर्क में था और डिजिटल प्लेटफार्म के जरिये उसे निर्देश दिए जा रहे थे। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकवादी संगठन अब पारंपरिक हथियारों से ज्यादा ‘डिजिटल रेडिकलाइजेशन’ पर फोकस कर रहे हैं।

टीटीएच’ लिखकर दहशत फैलाने का था टास्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान में बैठा शहजाद भट्टी सीधे आतंकी कार्रवाई के बजाय मनोवैज्ञानिक दहशत फैलाने की रणनीति पर काम करता है।

एसटीएफ की जांच में सामने आया कि विक्रांत कश्यप को शुरुआती टास्क के तौर पर देहरादून स्थित आइएसबीटी, पुलिस मुख्यालय, आइएमए और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी भवनों के आसपास ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच)’ लिखने को कहा गया था, ताकि राज्य में भय और असुरक्षा का माहौल बनाया जा सके।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह ‘लो कास्ट हाई इम्पैक्ट’ माडल है, जिसमें बिना बड़े संसाधनों के केवल डिजिटल नेटवर्क व स्थानीय संपर्कों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जाती है।

पांच राज्यों तक मिले लिंक

एसटीएफ ने जब विक्रांत कश्यप का मोबाइल और डिजिटल रिकार्ड खंगाला तो उसमें 10 संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले। जांच में उसके संपर्क महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर व उत्तर प्रदेश तक पाए गए है। एसटीएफ ने इन राज्यों की एजेंसियों को पत्र लिखकर संदिग्ध नेटवर्क की जानकारी साझा की है। आशंका जताई जा रही है कि यह माड्यूल अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे स्लीपर नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा था।

अब डिजिटल प्लेटफार्म बना नया हथियार

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता सिर्फ फिजिकल नेटवर्क तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आया है कि कट्टरपंथी संगठन अब इंटरनेट मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स व आनलाइन चैनलों के जरिये युवाओं को प्रभावित करने की रणनीति अपना रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक कुछ संदिग्ध डिजिटल अकाउंट्स और आनलाइन ग्रुप्स की पहचान की गई है, जिनके जरिए भड़काऊ सामग्री साझा की जा रही थी। एजेंसियों को आशंका है कि इंटरनेट मीडिया के माध्यम से युवाओं में कट्टर सोच फैलाने और उन्हें नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश हो रही थी।

श्रमिक वर्ग को बना रहे आसान निशाना

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पाकिस्तान में बैठा एजेंट शहजाद भट्टी आर्थिक रूप से कमजोर और श्रमिक वर्ग के लोगों को टारगेट बना रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मजदूरी करने वाले युवाओं को पहले आर्थिक मदद, आनलाइन संपर्क और भावनात्मक बातचीत के जरिए नेटवर्क में फंसाया जाता है, फिर उन्हें छोटे-छोटे टास्क दिए जाते हैं।

संवेदनशील स्थलों पर बढ़ी निगरानी

राज्य में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, धार्मिक स्थलों और सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है।

एसटीएफ लगातार केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के संपर्क में है और साझा इनपुट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में किसी भी तरह की कट्टरपंथी गतिविधि को पनपने नहीं दिया जाएगा। साइबर मानिटरिंग को अब सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बना दिया गया है।

एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती

फर्जी डिजिटल अकाउंट्स की पहचान, एन्क्रिप्टेड चैट ट्रैक करना, छोटे माड्यूल और स्लीपर सेल पकड़ना, आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को कट्टरपंथ से बचाना और इंटरनेट मीडिया के जरिए फैल रही भड़काऊ सामग्री रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।

सवाल यह भी है कि देवभूमि में डिजिटल नेटवर्क के जरिए स्लीपर माड्यूल तैयार करने की कोशिश हो रही थी? एसटीएफ व केंद्रीय एजेंसियों की जांच अब इसी सवाल का जवाब तलाश रही है।

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