देहरादून। प्रेमनगर के पौंधा जंगल में हुई अकरम मुठभेड़ के बाद पुलिस की कहानी अब कई सवालों और उलझनों के बीच घिरती जा रही है।
घटनाक्रम की परतें खुलने के साथ साफ हो रहा है कि मुठभेड़ से पहले और बाद की कई कड़ियां ऐसी हैं, जिनका आपस में तार सहज रूप से नहीं जुड़ रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अकरम को गुरुवार को अदालत में पेश होना था, उसने उससे पहले कथित रूप से लूट जैसी वारदात क्यों की।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार, अकरम वर्ष 2014 में नकरौंदा के चर्चित अंकित थपलियाल हत्याकांड के बाद गुजरात भाग गया था। वहां उसने अपनी पहचान बदलकर सलीम नाम से एक ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया। उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ और लंबी तलाश के बाद वर्ष 2017 में देहरादून पुलिस ने गुजरात से उसे गिरफ्तार कर वापस लाया
लगातार बदलता रहा ठिकाने
गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलने पर अकरम फिर उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहा और शामली, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर में लगातार ठिकाने बदलता रहा। पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2024-25 में वह देहरादून के पटेलनगर क्षेत्र में भी कुछ समय तक रहा, यानी वह पूरी तरह पुलिस निगाहों से बाहर नहीं था
अब जबकि उसकी गुरुवार को अदालत में पेशी तय थी, घटनाक्रम यहीं सबसे ज्यादा उलझता है। सवाल उठ रहा है कि यदि वह पेशी के लिए शहर में था, तो फिर उससे कुछ घंटे पहले पौंधा रोड क्षेत्र में लूट जैसी वारदात को अंजाम देने की जरूरत क्यों पड़ी। जिस व्यक्ति को अदालत में उपस्थित होना था, वह खुद ऐसी वारदात कर पुलिस का ध्यान अपनी ओर क्यों खींचेगा, यही बिंदु पूरी कहानी की सबसे कमजोर कड़ी बन रहा है।
पुलिस का दावा है कि पौंधा रोड पर पेट्रोल पंप कारोबारी से नकदी और मोबाइल लूटने के बाद अकरम व उसके साथियों का पीछा किया गया और जंगल में मुठभेड़ हुई। लेकिन यदि अदालत पेशी प्राथमिकता थी तो शहर छोड़ने का सामान्य रास्ता छोड़कर पौंधा जंगल की ओर जाने का फैसला भी सहज नहीं लगता।