बेटी की शादी सिर पर, सिलिंडर के लिए दर-दर भटक रहा पिता

देहरादून। बेटी की शादी सिर पर है, घर में तैयारियां चल रही हैं, मेहमानों की सूची बन चुकी है, मगर रसोई की सबसे जरूरी व्यवस्था अब तक अधूरी है। शादी-ब्याह वाले घरों में आजकल यही चिंता सता रही है।

बैशाखी के साथ 13 अप्रैल से शादी-ब्याह के मुहूर्त शुरू हो रहे हैं, लेकिन गैस सिलिंडर को लेकर अनिश्चितता ने बड़ा संकट खड़ा किया हुआ है। ऐसे दर्जनों परिवारों की तरह विकासनगर हरबर्टपुर निवासी जयप्रकाश सेमवाल कई दिनों से हाथ में प्रशासनिक आदेश लेकर गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है

जिस घर में इन दिनों शादी की तैयारियों की रौनक होनी चाहिए थी, वहां गैस सिलिंडर की चिंता ने माहौल भारी किया हुआ है। स्थिति यह है कि सेमवाल को आवश्यक गैस सिलिंडर जुटाने को प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है और विभागीय निर्देश भी जारी हो चुके हैं, लेकिन परिवार को अब तक सिलिंडर नहीं मिल पाए हैं।

शादी के कार्ड के साथ सेमवाल ने गत 27 मार्च को एसडीएम विकासनगर के समक्ष प्रार्थना-पत्र दिया था। बेटी आयुषी की शादी के लिए 10 सिलिंडर उपलब्ध कराने की मांग की गई। एसडीएम ने पूर्ति विभाग को सिलिंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद जिला पूर्ति अधिकारी ने हरबर्टपुर की अनमोल गैस एजेंसी को आवश्यक 10 सिलिंडर उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए, लेकिन आरोप है कि एजेंसी संचालक ने सिलिंडर देने से इन्कार कर दिया

जयप्रकाश सेमवाल का कहना है कि वह कई बार एजेंसी जाकर अनुरोध कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें इंतजार करने या बाद में आने को कहा गया। शादी की तारीख नजदीक आने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि भोजन व्यवस्था का पूरा दारोमदार गैस पर टिका है। यह अकेले सेमवाल की चिंता नहीं है, बल्कि उन दर्जनों परिवारों की चिंता है, जिनके परिवार में आने वाले दिनों में शादी है

शादी का कार्ड भी नहीं बना आधार

सेमवाल ने आवेदन के साथ बेटी की शादी का कार्ड संलग्न किया, ताकि अतिरिक्त सिलिंडर की मांग को वास्तविक और जरूरी माना जाए। परिवार को उम्मीद थी कि सामाजिक अवसर को देखते हुए प्राथमिकता पर व्यवस्था होगी, लेकिन एजेंसी स्तर पर कोई राहत नहीं मिली। परिवार का कहना है कि जब शादी जैसी स्थिति में भी आदेश प्रभावी नहीं हो रहे, तो सामान्य उपभोक्ता की स्थिति सहज समझी जा सकती है।

आदेश जारी, फिर भी एजेंसी अड़ी

एसडीएम के निर्देश के बाद जिला पूर्ति अधिकारी ने संबंधित गैस एजेंसी को स्पष्ट रूप से सिलिंडर उपलब्ध कराने को कहा। इसके बावजूद परिवार को राहत नहीं मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे एजेंसी संचालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक आदेश यदि जमीनी स्तर तक लागू नहीं हो पा रहे, तो शिकायत व्यवस्था की प्रभावशीलता भी कमजोर दिखती है।

डीजल भट्टी का विकल्प भी अधूरा

प्रशासनिक स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में डीजल भट्टी उपयोग करने की सलाह दी जा रही है, लेकिन पेट्रोल पंप संचालक कैन में डीजल देने से मना कर रहे हैं। उनका कहना है कि खुले पात्र में डीजल देना नियमों के विरुद्ध है। ऐसे में जिन परिवारों के पास वाहन उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए डीजल जुटाना भी कठिन हो गया है। ऐसे में परिवारों के सामने स्थिति यह है कि न गैस उपलब्ध है और न ही दूसरे साधन आसानी से मिल पा रहे।

सामाजिक आयोजनों में बढ़ी परेशानी

क्षेत्र के कई परिवारों का कहना है कि शादी-ब्याह और बड़े आयोजनों में अतिरिक्त गैस की जरूरत पड़ती है। एक-दो घरेलू सिलिंडर से काम नहीं चलता। बाजार से ऊंचे दाम पर इंतजाम करना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ता है और समय पर व्यवस्था न होने का तनाव अलग रहता है।

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